हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ऑनलाइन रिकॉर्ड में सामने आए लंबित कंसेंट मामलों ने उद्योगों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब मोर्चा के नेताओं ने नालागढ़ में आयोजित चर्चा के दौरान सरकार और हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इन मामलों की तत्काल जांच करवाने की मांग की।
पंजाब मोर्चा के अनुसार वर्ष 2017 से 2026 तक के ऑनलाइन रिकॉर्ड में हिमाचल प्रदेश में कुल 1281 औद्योगिक कंसेंट मामले लंबित हैं। इनमें सबसे अधिक 469 मामले सोलन-बद्दी क्षेत्र से संबंधित हैं। इसके बाद सोलन-परवाणू में 134, जबकि कुल्लू में 167, कांगड़ा में 133 और सिरमौर में 109 मामले लंबित बताए गए हैं।
पंजाब मोर्चा ने मांग की है कि लंबित मामलों का तत्काल सत्यापन करवाकर यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित औद्योगिक इकाइयां वैध वैधानिक मंजूरियों के साथ संचालित हो रही हैं या नहीं। साथ ही जिन उद्योगों की कंसेंट या नवीनीकरण प्रक्रिया लंबित है, उनका मौके पर निरीक्षण करवाकर स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
रेड कैटेगरी उद्योगों पर सख्ती की मांग
पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने कहा कि लंबित मामलों की इतनी बड़ी संख्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि जिन औद्योगिक इकाइयों की कंसेंट या नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उनकी जांच कर उनके अनुमोदन की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
राणा ने आरोप लगाया कि रेड कैटेगरी के उद्योगों के मामले में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई का असर सतलुज नदी सहित पंजाब के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के जल एवं पर्यावरण पर पड़ सकता है। राणा ने यह कहा कि बात अब हिमाचल व पंजाब की नहीं बल्कि हमारा संघर्ष अब उत्तर भारत के पर्यावरण की रक्षा के लिए है।
सोमवार तक बोर्ड अधिकारियों को कानूनी नोटिस
गौरव राणा ने बताया कि पंजाब मोर्चा की कानूनी टीम ने हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव और सदस्य सचिव को इस मामले में कानूनी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को ये नोटिस सोमवार तक मिल जाएंगे।
वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता अमितोज सिंह मान ने मांग की कि सरकार प्रत्येक औद्योगिक इकाई की कंसेंट स्थिति को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध करवाए, ताकि आम जनता भी यह जानकारी प्राप्त कर सके कि कौन-सी औद्योगिक इकाई वैध स्वीकृतियों के तहत संचालित हो रही है।
चमकौर साहिब मोर्चा के नेता खुशविंदर सिंह ने कहा कि हिमाचल-पंजाब सीमा से सटे औद्योगिक क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि पंजाब की नदी जल संपदा को सुरक्षित रखा जा सके। हिमाचल प्रदेश के माजरा गांव निवासी कैप्टन हिम्मत सिंह मजरा ने कहा कि 1281 लंबित कंसेंट मामलों का आंकड़ा अपने आप में विस्तृत जांच की मांग करता है।
वहीं नरेश कुमार भगला ने पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए व्यापक जमीनी निरीक्षण करवाने की मांग की।
भगवंत सिंह मत्तोर तथा आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं महिला नेताओं ऋतु रानी और निशु रानी ने कहा कि स्वच्छ पानी और स्वच्छ पर्यावरण लोगों का बुनियादी अधिकार है और इससे किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। पंजाब मोर्चा के अध्यक्ष गुरदियाल सिंह सहित अन्य नेताओं ने कहा कि संगठन इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ जनअभियान के माध्यम से भी उठाएगा।