हाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल, चीन के साथ लगती अपनी सीमा पर भूस्खलन के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली को फिर से लगाने की योजना बना रहा है। इसके तहत सिस्मिक सेंसर, कैमरे और एक सैटेलाइट लिंक स्थापित किया जाएगा।
नेपाल सरकार के दो सूत्रों ने बताया कि ये उपकरण रसुवा जिले में तिमुरे नामक एक सीमावर्ती बस्ती में लगाए जा रहे हैं। यह चीन सीमा के उसी नदी कारिडोर पर है, जहां ग्लेशियर के टूटने से कीचड़, पानी और चट्टानों की एक बड़ी दीवार पहाड़ी घाटियों में फैल गई थी।
नेपाल चीन सीमा पर पूर्व चेतावनी प्रणाली लगाएगा
नेपाल ने हालांकि अभी तक इस योजना की घोषणा नहीं की है। एक सूत्र ने कहा, इस घटना के बाद भूदृश्य में परिवर्तन हो रहा है, इसलिए कुछ और भूस्खलन हो सकते हैं।दोनों सूत्रों ने बताया कि योजना के केंद्र में एक सेटेलाइट सिस्टम है जिसे वेरी स्माल अपर्चर टर्मिनल (वीसेट) के नाम से जाना जाता है।
इसका मकसद मोबाइल नेटवर्क बंद होने पर भी मानिटरिंग पोस्ट को कनेक्टेड रखना है, ताकि वे नए खतरों को पहचान सकें और जल्दी से चेतावनी जारी कर सकें। एक सूत्र ने कहा, हमारे पास सेंसर और मानिटरिंग स्टेशन थे, लेकिन उन पर अच्छे से मानिटरिंग नहीं हो रही थी।
सिस्मिक सेंसर, कैमरे, सैटेलाइट लिंक का उपयोग होगा
पिछली पूर्व चेतावनी प्रणाली के बारे में उन्होंने बताया जो हर कुछ मिनट में एक संदेश भेजता था, वह बाढ़ में बह गया। इसलिए हम चेक नहीं कर पाए कि वे कब फेल हुए।
दूसरे सूत्र ने कहा कि अभी के लिए कैमरे, सेंसर और वीसेट को नेपाल का राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) एक ही स्थान पर लगाएगा, बाद में और भी लगाए जाएंगे।
उनकी जगह का अनुमान लगाने के लिए पहले ही हेलीकाप्टर से इलाके का सर्वे कर लिया गया है। बताते हैं कि पूर्व चेतावनी प्रणाली से भी लोगों को अलर्ट करने के लिए बस कुछ ही मिनट मिलेंगे जो बेहद अल्पावधि है।