मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य के गृह विभाग के उस आदेश को पूरी तरह रद कर दिया है, जिसमें एक महिला असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (एडीपीपीओ) को प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान ‘नैतिक अधमता’ के आधार पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।
आशुतोष शुक्ला और सिद्धार्थ पांडे की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित कर्मचारी पूजा गुप्ता पर पूर्व में दहेज उत्पीड़न का एक मामला दर्ज था, जिसमें दिसंबर 2015 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए ससम्मान बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
इसके बावजूद गृह विभाग ने अपने बर्खास्तगी आदेश में यह दलील दी थी कि भले ही कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया हो, लेकिन उन पर लगे आरोप ‘नैतिक अधमता’ की परिभाषा के दायरे में आते हैं।
इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘नैतिक अधमता’ का निष्कर्ष केवल उसी ट्रायल कोर्ट से आना चाहिए था जिसने अधिकारी को बरी किया था, न कि उस प्रशासनिक अथॉरिटी से जिसने बिना कोई स्वतंत्र जांच किए ही सीधे उन्हें नौकरी से निकाल दिया।
सुनवाई के दौरान पूजा गुप्ता ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए यह भी तर्क दिया कि उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में शामिल होने और फॉर्म भरने के दौरान ही अपने खिलाफ चल रहे इस कानूनी मामले और उसके बाद आए अदालती नतीजे की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से विभाग को दे दी थी, जिसे छिपाया नहीं गया था।
हाई कोर्ट के इस न्यायसंगत फैसले के बाद अब कर्मचारी की नौकरी बहाल होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।