महाराष्ट्र में हुए एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब दो करोड़ मतदाताओं का नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आने के साथ ही कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के विवाद को एक बार फिर से उठाते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोला है।
पार्टी ने कहा है कि इतनी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने से साफ हो गया है कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में वोट चोरी और धांधली की जो बातें उठाई थीं, वह सच है और ड्राफ्ट मतदाता सूची ने भाजपा तथा चुनाव आयोग के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा महाराष्ट्र में एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशन के आंकड़ों के आधार पर वोट वोरी के मुद्दे पर आयोग पर कई तीखे सवाल दागे। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक्स पर जारी बयान में कहा-भाजपा और चुनाव आयोग के झूठ अब उनके गले की फांस बन गए हैं।
एसआईआर के तहत महाराष्ट्र की मतदाता सूची से लगभग दो करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं।
खुद चुनाव आयोग ने माना था कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच सिर्फ पांच महीनों में लगभग 40 लाख वोटर जोड़े गए थे। राहुल गांधी और कांग्रेस ने उस समय इस असामान्य बढ़ोतरी की बात उठाई थी। लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग ने हमारी चिंताओं को खारिज कर वोटर लिस्ट को पूरी तरह विश्वसनीय बताया था।
अब दो साल बाद एसआईआर में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की वजह से भाजपा-चुनाव आयोग की जोड़ी ने देश के सामने अपने ही झूठ की पोल खोल दी है।
ड्राफ्ट सूची के आंकड़ों के आधार पर पार्टी ने अपनी प्रारंभिक आपत्तियों को उठाते हुए दो साल में ही वोटर लिस्ट में इतने अंतर का जिक्र करते हुए कहा कि इससे कुछ अहम सवाल उठते हैं।
पवन खेड़ा ने पूछा कि अगर दो साल पहले मतदाता सूची एकदम सही थी, तो अब लगभग दो करोड़ वोटरों के नाम क्यों हटाए जा रहे हैं? अगर इसमें कोई कमी नहीं थी तो भाजपा और चुनाव आयोग ने इतने भरोसे के साथ ऐसा क्यों कहा था? और दो साल पुरानी इस गड़बड़ मतदाता सूची से मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी के तौर पर भाजपा की वैधता के बारे में क्या पता चलता है?
साफ संकेत मिल रहे हैं, वोटों की चोरी सच है। धांधली वाले चुनाव सच हैं। थोपी गई सरकारें सच हैं।