सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को मिले नकद चंदे से जुड़ी याचिका पर आज सुनवाई करेगा।
इस याचिका में आयकर अधिनियम के उस प्रविधान की वैधता को चुनौती दी गई है, जो राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम के ‘गुमनाम यानी पहचान गुप्त रखते हुए’ दिए गए नकद चंदे को स्वीकार करने की अनुमति देता है।
याचिका में कहा गया है कि पारदर्शिता की कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को कमजोर करती है, जिससे मतदाता चंदा देने वालों और उनके उद्देश्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रह जाते हैं। इससे वे मतदान करते समय तर्कसंगत, समझदारी भरा और पूरी जानकारी के साथ सही फैसला नहीं कर पाते।
कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आने वाली याचिकाओं की सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के इस मामले की सुनवाई करने की संभावना है। न्यायालय ने पहले केंद्र, चुनाव आयोग और अन्य को नोटिस जारी कर मामले में जवाब-तलब किया था।
खेम सिंह भाटी द्वारा दाखिल याचिका में अनुरोध किया गया है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिह्न के आवंटन के लिए यह शर्त तय की जाए कि कोई भी राजनीतिक दल नकद में कोई रकम नहीं ले सकता।
याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए की उपधारा (डी) को असंवैधानिक बताते हुए उसे रद करने का अनुरोध किया गया है। इसमें न्यायालय के 2024 के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें चुनावी बॉन्ड योजना को रद कर दिया गया था।