UPI से S-400 और ऊर्जा सहयोग तक, मोदी-पुतिन की आज अहम बैठक; भारत-रूस के बीच बड़े समझौतों पर नजर…

सोमवार को देर शाम किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पीएम नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी।

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली इस मुलाकात में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति सबसे बड़ा एजेंडा रहेगा।

दोनों नेता दिसंबर 2025 के वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद पहली बार आमने-सामने होंगे। वैसे दोनों नेता फिर से 12 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मिलेंगे।

बिश्केक में मोदी-पुतिन की बैठक 

विदेश मंंत्रालय पहले ही बता चुका है कि दोनों नेता भारत-रूस विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा करेंगे। क्रेमलिन ने बैठक को कई महत्वपूर्ण मुद्दों वाली वार्ता बताया है।

मोदी व पुतिन के बीच विस्तृत चर्चा 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी जारी रहने की संभावना है।

मोदी और पुतिन के बीच यह बैठक तब हो रही है जब अमेरिका की तरफ से रूस से कारोबार करने वाले सभी देशों पर व्यापक प्रतिबंध लगाया जा चुका है। दूसरी तरफ कई मुद्दों पर भारत व अमेरिका के बीच संबंध बहुत सहज नहीं है।

ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति मुख्य एजेंडा

भारत साफ कर चुका है कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितता की वजह से रूस से तेल व उर्वरक आपूर्ति उसकी प्राथमिकता है। रूस फिलहाल भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया मास्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने ईंधन और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया था। सोमवार की बैठक में दीर्घकालिक अनुबंध, भुगतान व्यवस्था और व्यापार असंतुलन दूर करने पर जोर रहने की संभावना है।

मौजूदा समय में रूस के साथ संबंधं में भारत की एक मात्र चिंता द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन है। दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ा है, लेकिन इसमें रूसी ऊर्जा निर्यात का बड़ा हिस्सा है। भारत चाहता है कि रूस भारतीय फार्मा, आईटी, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपना बाजार और खोले।

किन मुद्दों पर होगी बात?

दोनों देशो ने वर्ष 2030 तक आपसी कारोबार को बढा कर 100 अरब ऑलर करने का लक्ष्य रखा है। जानकारों का कहना है कि मोदी व पुतिन बैठक में रक्षा डिलीवरी भी एजेंडे में ऊपर होगी।

एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की शेष डिलीवरी, अतिरिक्त मिसाइलों का स्टाक और भारत में रखरखाव-मरम्मत सुविधा पर चर्चा हो सकती है। दोनों देश सह-उत्पादन और स्पेयर पार्ट्स के स्वदेशीकरण पर बात कर रहे हैं, इसकी भी समीक्षा होने की संभावना है।

अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध को और कठोर किये जाने की संभावनाओं के बीच दोनों नेता द्विपक्षीय भुगतान तंत्र को व्यापक व सुरक्षित बनाने पर भी बात करेंगे।

उद्देश्य यह होगा कि प्रतिबंधों के बीच व्यापार जारी रखने के व्यावहारिक उपायों को खोजा जाए। परमाणु ऊर्जा, उर्वरक संयंत्र और उच्च तकनीक सहयोग को दोनों पक्ष भविष्य के स्तंभ मानते हैं। पुतिन ने हाल में इन्हीं क्षेत्रों में प्रगति का उल्लेख किया था।

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