बिहार में प्याज की बढ़ती कीमत ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। दरभंगा समेत कई बाजारों में दो सप्ताह के भीतर प्याज के दाम में 57 प्रतिशत तक उछाल आया है।
पहले 35 से 40 रुपये प्रति किलो मिलने वाली प्याज अब 50 से 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कुछ खुदरा बाजारों में कीमत 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। सवाल यह है कि आखिर प्याज के दाम में इतनी तेजी क्यों आई?
त्योहारों में बढ़ी मांग
जिले में प्रतिदिन करीब 40 से 60 टन प्याज की खपत होती है। त्योहारों के मौसम में मांग में लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। मांग बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
बारिश और कम आवक का असर
दरभंगा की मंडियों में मुख्य रूप से नासिक और मध्य प्रदेश से प्याज की आपूर्ति होती है। भारी बारिश और किसानों के दूसरी फसलों की ओर रुख करने से मंडियों में प्याज की आवक 30 से 40 प्रतिशत तक घट गई है। कम आवक के कारण थोक से लेकर खुदरा बाजार तक कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
थोक बाजार में भी महंगी प्याज
थोक बाजार में प्याज की कीमत 44 से 46 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर सरकारी बफर स्टाक की सीधी खुदरा पहुंच सीमित होने से उपभोक्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिल रही है। हालांकि, हाल के दिनों में थोक बाजार में कीमतों की रफ्तार कुछ धीमी हुई है।
लहसुन ने भी बिगाड़ा बजट
प्याज के साथ लहसुन की कीमत में भी तेजी आई है। एक सप्ताह पहले 140 से 180 रुपये प्रति किलो बिकने वाला लहसुन अब 180 से 200 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। जिले में प्रतिदिन करीब पांच से आठ टन लहसुन की खपत होती है।
जमाखोरी पर प्रशासन की नजर
जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि बाजार में जमाखोरी और बिचौलियों द्वारा कृत्रिम किल्लत पैदा करने की आशंका पर नजर रखी जा रही है। थोक विक्रेताओं को प्रतिदिन अपना स्टाक पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। कोई भी विक्रेता 30 दिनों से अधिक समय तक स्टाक अपने पास नहीं रख सकता है।
नई फसल तक राहत मुश्किल
बाजार समिति के व्यापारियों के अनुसार, अगले एक-दो महीने तक कीमतों से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है। नई फसल की आवक अक्टूबर के मध्य या नवंबर की शुरुआत में होने की संभावना है। बड़ा बाजार के व्यापारी मो. मुश्ताक ने बताया कि नासिक और इंदौर की मंडियों से माल महंगा आ रहा है, जिसका असर सीधे स्थानीय खुदरा बाजार पर पड़ रहा है।
कीमत एक नजर में
- प्याज – 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 55 से 60 रुपये प्रति किलो।
- लहसुन – 150-160 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 190-200 रुपये प्रति किलो।