नेपाल में आई भीषण बाढ़ के चलते रसुवा जिले की कम से कम छह हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में 500 से अधिक लोग फंस गए हैं। नेपाल सेना और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (NAPF) के लगभग 11,000 जवान खराब मौसम, टूटी हुई सड़कों, भारी कीचड़ और मलबे की चुनौतियों से जूझते हुए अब तक का सबसे कठिन राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य नेपाली सेना और NAPF द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है, जिसमें सेना के 7,000 और एनएपीएफ के 4,000 जवान तैनात हैं।
500 लोगों के फंसे होने की आशंका
एनएपीएफ के प्रवक्ता और डीआईजी नेत्र बहादुर कार्की ने टीओआई से बातचीत के दौरान बताया कि बचाव टीमों का मुख्य ध्यान ऊपरी त्रिशूली, ऊपरी त्रिशूली-1, रसुवा, त्रिशूली 3A, चिलिमे खोला और लांगटांग जलविद्युत परियोजनाओं पर है, जहां कम से कम 500 लोगों के फंसे होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त टीमें ड्रोन जैसे संसाधनों का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन बारिश, खराब मौसम और कटे हुए रास्तों के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है। हालांकि, सुबह बारिश के कारण रुके काम को दोपहर में दोबारा शुरू कर दिया गया है और रसुवा के धुंचे तक चार पहिया वाहनों के लिए सड़क खोल दी गई है।
बड़े-बड़े पत्थर और भारी कीचड़ से रेस्क्यू में आ रही दिक्कत
कार्की ने बताया कि चुनौतियों को और बढ़ाते हुए, पनबिजली संयंत्रों के पास बड़े-बड़े पत्थर और भारी कीचड़ है, जिससे फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए निकास मार्ग साफ करना मुश्किल हो रहा है। वर्तमान बचाव अभियान बल द्वारा अब तक चलाए गए सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक है, त्रासदी के पहले दिन से ही हमारे 13 जवान लापता हैं।
6 साल की बच्ची को सुरक्षित निकाला
एनएपीएफ प्रवक्ता कार्की के अनुसार, रसुवा के तिमुरे में मलबे के नीचे लगभग 60 घंटे तक दबी 6 साल की बच्ची ‘मनीषा’ को शुक्रवार शाम सुरक्षाकर्मियों ने रोने की आवाज सुनकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया, हालांकि उसके माता-पिता के बारे में अभी तक पता नहीं चला है।
दूसरी ओर, नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बसनेट ने बताया कि त्रिशूली 3ए जलविद्युत सुरंग में जमा कीचड़ और पत्थरों को हटाकर निकास मार्ग खोजने के लिए ड्रिलिंग मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।