पिछले 12 वर्षों में विभिन्न सरकारी योजनाओं के करोड़ों लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 53 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं, जिनमें से ज्यादातर जन धन खाताधारक हैं।
भारत सरकार के प्लेटफार्म ‘माईगाव इंडिया’ ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान में 59 करोड़ जन धन खाते हैं, जिनमें से 33 करोड़ खाताधारक महिलाएं हैं, जो सभी जन धन खाता धारकों का 56 प्रतिशत हैं।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) ने अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए। ‘माईगाव इंडिया’ ने कहा, “लाभार्थियों को सीधे धन हस्तांतरित करने में सक्षम बनाकर, डीबीटी ने बिचौलियों को कम करने और लोगों के कल्याण को अधिक पारदर्शी व कुशल बनाने में मदद की है।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 अगस्त, 2014 को अपने शुरुआती कार्यक्रमों में से एक के रूप में शुरू की गई पीएमजेडीवाई, दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल है और यह योजना दुनियाभर में वित्तीय समावेशन का एक उदाहरण बन गई है।
न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता नहीं
पीएमजेडीवाई सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक व्यस्क का बैंक खाता हो, जिसमें न्यूनतम शेष राशि की कोई आवश्यकता नहीं है और न ही कोई रखरखाव शुल्क है।
प्रत्येक खाते में एक मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड आता है, जो दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करता है। खाताधारक आपात स्थिति में 10 हजार रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा के भी पात्र हैं।
46 करोड़ खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में
ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में 46 करोड़ जन धन खातों के साथ वित्तीय समावेशन प्रमुख शहरों से विभिन्न समुदायों तक पहुंच रहा है। ये खाते सभी जन धन खातों का 78 प्रतिशत हैं, जो पूरे भारत में बैंकिंग नेटवर्क की गहरी पहुंच को दर्शाते हैं।
वर्तमान में लगभग 100 प्रतिशत गांवों में पांच किमी के भीतर एक बैंकिंग आउटलेट है। इस विस्तार ने आवश्यक वित्तीय सेवाओं को ग्रामीण समुदायों के करीब ला दिया है।
41 करोड़ से अधिक रुपे कार्ड जारी
जन धन खाताधारकों को अब तक 41 करोड़ से अधिक रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे लाखों लोगों को डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे से जुड़ने में मदद मिली है। इसके अलावा 13.5 लाख से अधिक ‘बैंक मित्र’ पारंपरिक शाखाओं से परे बैंकिंग सेवाओं को लोगों के करीब लाने में मदद कर रहे हैं।