भारत ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षमता विस्तार की गति बढ़ा दी है और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
शुक्रवार को जारी आधिकारिक फैक्ट शीट में बताया गया कि इस समय में देश में 24 परमाणु ऊर्जा संयंत्र काम कर रहे हैं। इनकी कुल कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावाट है। 7.5 गीगावाट की संयुक्त क्षमता वाले नौ संयंत्रों का निर्माण चल रहा है।
फैक्ट शीट में कहा गया है कि सरकार ने 10 स्वदेशी प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्लूआर) को स्थापित करने को मंजूरी दी है। 500 मेगावाट के दो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (एफबीआर) के लिए प्रारंभिक परियोजना गतिविधियों को भी मंज़ूरी दी गई है।
भारत का परमाणु कार्यक्रम तकनीकी आत्मनिर्भरता की रणनीति पर आधारित है। इसे देश के विशाल थोरियम भंडार का इस्तेमाल करने और साथ ही ईंधन पर लगे पुराने प्रतिबंधों से निपटने के लिए विकसित किया गया था।
फैक्ट शीट में भारत के स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए तीन-चरण वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का उल्लेख किया गया है। इसके तहत भारत यूरेनियम-आधारित ईंधन से थोरियम-आधारित ईंधन की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
यह देश में ही नवाचार को बढ़ावा देने के साथ स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उत्पादन कर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के भारत के विजन में योगदान दे रहा है।
भारत के पास थोरियम का प्रचुर भंडार है।भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिनके पास उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी अपशिष्ट के लिए वाइट्रिफिकेशन तकनीक है। यह प्रक्रिया रेडियोधर्मी अपशिष्ट को कांच के रूप में परिवर्तित करती है, जिससे इसे दीर्घकालिक भंडारण, परिवहन और निपटान के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।
फैक्टशीट के अनुसार सरकार ने बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए परमाणु ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया है।
परमाणु ऊर्जा से बिना कम-कार्बन चौबीसों घंटे बिजली उत्पादन संभव है। इससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही भारत को अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।