राजधानी दिल्ली में खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाने के बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर बिचौलियों (मिडिलमैन) को जिम्मेदार ठहराया है।
उन्होंने चिंता जताई कि जब कुछ महीने पहले महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरकर सात से आठ रुपये प्रति किलो रह गए थे, तब किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पाई थी। आज जब किसानों का स्टाक खत्म हो चुका है और दाम आसमान छू रहे हैं, तो इसका लाभ किसानों को न मिलकर बिचौलिए उठा रहे हैं।
गुरुवार को यहां एक कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने दो टूक सवाल किया कि क्या किसानों को उनके पसीने की पूरी कीमत नहीं मिलनी चाहिए और क्या बिचौलियों को इतना मुनाफा कमाने का हक है?
सरकार इस पर सख्त कार्रवाई कर रही है और एक ऐसा तंत्र विकसित करने की योजना बना रही है जिससे किसानों को उचित लाभ मिले और आम उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक खेती पर जोर
वर्तमान वैश्विक हालातों – जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों – का हवाला देते हुए कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत खाद्य सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रह सकता।
सतत विकास और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण, और जलवायु-अनुकूल कृषि अपनानी होगी।
कृषि विज्ञानियों को प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचने और उनकी समस्याओं के आधार पर शोध करने की सलाह दी गई है।
पर्यावरण संरक्षण व भावी पीढ़ियों की जिम्मेदारी
नेपाल की हालिया आपदा और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का जिक्र करते हुए शिवराज ने चेतावनी दी कि भौतिक प्रगति की अंधी दौड़ में हमने प्रकृति के साथ ऐसा खिलवाड़ किया है कि एक के बाद एक गंभीर संकट सामने आ रहे हैं।
उन्होंने संवेदनशीलता के साथ रेखांकित किया कि यह धरती केवल हमारी नहीं है, बल्कि इस पर आने वाली भावी पीढ़ियों का भी समान अधिकार है।
सतत कृषि केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिकी, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी एक अहम आधार है।
दिल्ली में 35 रुपये किलो की रियायती दर पर प्याज की बिक्री
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू कर दी है, जो मौजूदा बाजार भाव से लगभग 44 प्रतिशत कम है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने स्पष्ट किया कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण जमाखोरी, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी है, जबकि देश में त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्याज उपलब्ध है।
सरकार ने फिलहाल प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से इन्कार किया है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 3.82 लाख टन प्याज का निर्यात दर्ज किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से खुले बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।