अमेरिका की नई टैरिफ नीति: आखिर क्यों ट्रंप के निशाने पर भारत, कनाडा समेत 10 प्रमुख देश? जानें वजह…

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार नीति अब सिर्फ व्यापार घाटे तक सीमित नहीं रही। टैरिफ और प्रतिबंधों का इस्तेमाल अब युद्ध, रूसी तेल, प्रवासन, नशीली दवाओं की तस्करी, परमाणु कार्यक्रम और यहां तक कि सहयोगी देशों की घरेलू नीतियों से जोड़कर किया जा रहा है। इससे कई देशों पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

आखिरकार ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 10 देशों पर टैरिफ क्यों लगाए इसके कारण मुख्य रूप से ये हैं।

भारत

भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा, जिससे कुल बोझ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। बाद में अंतरिम समझौते के तहत इसे घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात हुई, लेकिन पूरा समझौता अभी अधूरा है।

जुलाई में फोर्स्ड लेबर से जुड़े सेक्शन 301 के तहत 10 प्रतिशत नया टैरिफ भी लगा। साथ ही एच-1बी वीजा फीस बढ़ाई गई है, जिसका असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर ज्यादा पड़ रहा है।

कनाडा

फेंटनाइल तस्करी और अवैध प्रवासन का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया। कनाडा ने जवाब में अमेरिकी सामान पर 15 से 50 प्रतिशत जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 8 सितंबर से लागू होगा। ऑटो सेक्टर पर भी 2027 से बड़े टैरिफ का खतरा है।

ईरान

परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल और तेल निर्यात को निशाना बनाते हुए अमेरिका ने लगभग 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रेजरी सचिव ने इसे आर्थिक डी-डे बताया है। तीसरे देशों पर भी सेकेंडरी प्रतिबंधों का खतरा है। वहीं, अमेरिका ने ईरान पर इस साल जमकर हमला बोला है।

यूरोपीय संघ

अधिकांश यूरोपीय सामान पर 15 प्रतिशत टैरिफ सीमा तय हुई, लेकिन रक्षा खर्च, रूस पर रुख और प्रवासन मुद्दे दबाव बनाए हुए हैं। फोर्स्ड लेबर जांच के तहत भी अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए।

कोलंबिया

डिपोर्टेशन उड़ानों और नशीली दवाओं की नीति को लेकर विवाद। सेक्शन 301 के तहत 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा है।

चीन

फेंटनाइल प्रीकर्सर्स को लेकर पहले अतिरिक्त 10-20 प्रतिशत टैरिफ लगा। बाद में चीन ने नियंत्रण कड़े किए तो इसे घटाया गया। अब ईरानी तेल खरीद और अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लेकर नए टैरिफ का खतरा है। वर्तमान में सेक्शन 301 के तहत 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू है।

रूस

यूक्रेन युद्ध के कारण व्यापक प्रतिबंध जारी हैं। रूसी तेल खरीदने वाले देशों (भारत, चीन सहित) पर 100 प्रतिशत तक सेकेंडरी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेट में है।

मेक्सिको

अवैध प्रवासन और फेंटनाइल को लेकर 2025 में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया। यूएसएमसीए के तहत ज्यादातर सामान मुक्त है, लेकिन फोर्स्ड लेबर के तहत 10 प्रतिशत टैरिफ लगा है।

वेनेजुएला

तेल, नशीली दवाएं और प्रवासन को जोड़ते हुए वेनेजुएलाई तेल खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी गई। व्यापक प्रतिबंध भी जारी हैं। वहीं, तस्करी के मामले को लेकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया है।

क्यूबा

तेल आपूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए क्यूबा को तेल बेचने वाले देशों पर टैरिफ का खतरा। हाल में खनन और निर्माण क्षेत्रों की संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए गए, जिससे बिजली संकट और बदतर हो रहा है।

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