रायपुर : पति के निधन के बाद अकेली हुईं लीला, महतारी वंदन ने दिया सहारा…

बोलीं- विष्णु भैया की योजना ने छोटे-छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर रहने की मजबूरी कम की

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और भरोसे का पर्व है। महासमुंद जिले के ग्राम बेमचा निवासी 49 वर्षीय श्रीमती लीला धु्रव के लिए इस बार की राखी इसी भरोसे की एक भावुक कहानी लेकर आई है। पति के निधन के बाद अकेले जीवन की जिम्मेदारियां संभाल रहीं लीला के लिए महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता मुश्किल समय में सहारा बनी है। वह कहती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली राशि ने उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी कम की है।

पति के निधन के बाद लीला के जीवन में आर्थिक संकट बढ़ गया। बेटियां उनके जीवन का सहारा थीं, लेकिन उनके विवाह की जिम्मेदारी भी उन्हें उठानी पड़ी। बेटियों की शादी के लिए उन्हें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। इसके बाद उनके पास आय का कोई नियमित साधन नहीं बचा। घर की जरूरतों और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बन गया।

पति के बाद बदली जिंदगी, बेटियों की शादी के बाद रह गईं अकेली

लीला ध्रुव बताती हैं कि पति के जाने के बाद जीवन बेहद कठिन हो गया था। बेटियों की शादी के बाद वे घर में अकेली रह गईं। रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता था। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी।

वह कहती हैं कि इस राशि से वे अपनी आवश्यक जरूरतों और छोटे-मोटे घरेलू खर्चों को पूरा कर लेती हैं। उनके लिए यह सहायता आर्थिक सहयोग के साथ आत्मसम्मान और अपने पैरों पर खड़े रहने का भरोसा भी देती है।

राखी पर विष्णु भैया ने दिया भरोसे का उपहार
रक्षाबंधन के अवसर पर भावुक होते हुए लीला धु्रव कहती हैं, ’’जिस तरह एक भाई अपनी बहन के सुख-दुख में उसके साथ खड़ा रहता है, उसी तरह विष्णु भैया ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से हम माताओं और बहनों को आर्थिक सुरक्षा और भरोसे का संबल दिया है। यह राशि केवल एक हजार रुपए नहीं है, बल्कि मेरे जैसी जरूरतमंद और अकेले जीवन जी रही महिलाओं के लिए आत्मसम्मान और भरोसे की पूंजी है। अब मुझे अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ता।’’
लीला के लिए रक्षाबंधन का यह अवसर योजना से मिले आर्थिक सहयोग के कारण और भी भावनात्मक बन गया है। वह इसे भाई की ओर से बहनों के लिए मिले भरोसे और सहारे के रूप में देखती हैं।

महतारी वंदन मुश्किल समय का सहारा बना

लीला धु्रव का कहना है कि पति के निधन के बाद उनके सामने आर्थिक चुनौतियां थीं, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता ने मुश्किल समय को कुछ आसान बनाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना उनके जैसी अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए आर्थिक संबल दे रही है।
रक्षाबंधन पर लीला धु्रव की कहानी उस भरोसे को सामने लाती है, जिसमें आर्थिक सहायता के साथ आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना भी जुड़ी है। उनके लिए महतारी वंदन योजना की राशि रोजमर्रा की जरूरतों का सहारा बनने के साथ यह विश्वास भी देती है कि कठिन परिस्थितियों में वे खुद को संभाल सकती हैं।

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