नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही: 157 लोगों की मौत, 133 भारतीयों समेत 750 से ज्यादा लापता; तस्वीरों में दिखा खौफनाक मंजर…

गुनगुनी चमकती धूप, खुशनुमा मौसम और बेफिक्र जिंदगी, तभी अचानक एक तेज सैलाब आया और अपने साथ सब कुछ बहाकर ले गया। बहुमंजिला इमारतें, महत्वपूर्ण पुल और इंसान खिलौनों की तरह देखते-देखते बह गए।

यह खौफनाक नजारा चीन-नेपाल सीमा पर देखने को मिला। चीन के तिब्बत का सैलाब नेपाल में तबाही मचाते हुए आगे बढ़ा और गांव-गांव, शहर-शहर बर्बादी का मंजर छोड़ता चला गया।

हिमस्खलन के कारण आए इस सैलाब से कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इस तबाही ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई जलप्रलय की याद दिला दी। नेपाल में बाढ़ के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है और दोनों राज्य अलर्ट पर हैं।

एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात

एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात कर दिया गया है। इस तबाही में अब तक चीन में तीन लोगों समेत लगभग 157 लोगों की मौत हुई है और 133 भारतीयों समेत लगभग 750 लोग लापता हैं। लापता भारतीयों में अधिकांश कैलास-मानसरोवर तीर्थयात्री हैं। चीन और नेपाल के अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या बढ़ने और भारी तबाही की आशंका जताई है।

अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे नेपाल के रसुवा व धादिंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण तिमुरे में भोटेकोशी के रास्ते भीषण बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक फैल गया। इसके बाद बाढ़ नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों तक फैल गई। राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए।

सेना और पुलिस बचाव व राहत कार्यों में तैनात

प्रेट्र के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है।

नेपाली सेना ने राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकाप्टर तैनात किए हैं। सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर फंसे 100 से अधिक लोगों को बचाया है।

रसुवा के प्रभावित इलाकों स्याप्रु बेसी और तिमुरे में बचाव हेलीकाप्टर नहीं उतर पाए। इस जिले की आबादी लगभग 50,000 है। नेपाल सेना ने त्रिशूली में मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर नंबर-1 में एक चिकित्सा केंद्र भी बनाया है। सेना के एक एमआइ-17 हेलीकाप्टर को भी त्रिशूली के जिला अस्पताल मदद के लिए भेजा गया है।

नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने ‘एक्स’ पर कहा, नदी के अवरुद्ध होने के स्थान पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह नहीं निकला है इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में खतरा अभी बना हुआ है।

प्रभाग ने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।’ एनडीआरआरएमए ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगली सूचना तक सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।

भूकंप के कारण हुआ हिमस्खलन

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि सुबह 8:37 बजे (स्थानीय समय) तिब्बत में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली। इससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से ग्लेशियर फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी। वहीं, जर्मन रिसर्च सेंटर फार जियोसाइंसेज (जीएफजे) ने कहा कि सिक्योरिटी फुटेज के टाइम-स्टैंप पर दिखाए गए समय से लगभग सात मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था।

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, स्काटलैंड की डंडी यूनिवर्सिटी के ग्लेशियोलाजिस्ट साइमन कुक ने कहा कि सेटेलाइट इमेजरी के शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि हिमस्खलन के कारण बाढ़ आई। उनके शुरुआती आकलन के अनुसार, ऊंचाई वाले ग्लेशियर से बर्फ की एक बहुत बड़ी शिला टूटकर हजारों फीट नीचे नेपाल में भोटेकोशी नदी की ओर गिरी, जिससे बहुत अधिक ऊर्जा निकली जिसने बर्फ को बाढ़ के पानी में बदल दिया।

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा 

एनडीआरआरएमए ने एक्स पर कहा कि प्लैनेट लैब्स की सेटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती अध्ययन से पता चला है कि लेंडे नदी में बर्फ व चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई। प्लैनेट लैब्स की पहले और बाद की तस्वीरों में नदी के सामान्य रास्ते के दोनों ओर बड़े पैमाने पर तबाही दिखाई दी।

काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फार इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट में क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंटल रिस्क के प्रमुख कियांगगोंग झांग ने कहा कि नेपाली हिस्से में लेंडे नदी में चट्टानों व हिमस्खलन की वजह की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, ‘नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी रुकावट बनी हुई है, इसलिए अधिकारियों ने दूसरी बार बाढ़ आ सकने की चेतावनी दी है।’

लापता लोगों में भारत के अलावा कई देशों के लोग

नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया कि लापता लगभग 750 लोगों में लगभग 265 लोग चीन की तरफ के हैं। नेपाल में लापता लोगों में लगभग 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय हैं। इनमें से 37 लोग तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कम से कम 50 भारतीय कैलास मानसरोवर तीर्थयात्री थे।

ईशा फाउंडेशन के अनुसार, उनके सेंटर के 77 लोग लापता है और ये लोग इमीग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे, जबकि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। नेपाली सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) के मुताबिक, लापता लोगों में अमेरिका के तीन और ब्रिटेन के 12 पर्यटकों के अलावा मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया व नीदरलैंड समेत दर्जनभर देशों के लोग भी शामिल हैं।

पांच जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त

प्रलयंककारी बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।

इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के अनुसार, प्रभावित चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं।

‘द काठमांडू पोस्ट’ ने उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चामेली गुरूंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।

पिछले साल भी आई थी बाढ़

पिछले साल भी भोटेकोशी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी। इसमें रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

भारत ने पहुंचाई मदद

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, भारत ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) पहल के तहत नेपाल को 10 टन सामग्री और आवश्यक दवाएं भेजी है। भारत इस मुश्किल समय में नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।

चीन ने कहा, गिरोंग पोर्ट हुआ प्रभावित

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि तिब्बत में आई बाढ़ ने गिरोंग काउंटी में स्थित गिरोंग बंदरगाह प्रभावित हुआ है और शिगात्से इलाके में सड़कें, संचार व बिजली की लाइनें कट गई हैं। ड्रोन फुटेज में बंदरगाह पर कुछ इमारतें मलबे में दबी हुई दिखाई दे रही हैं।

चीनी मीडिया के अनुसार, बचाव अभियान के लिए 601 कर्मचारी और 113 गाड़ियां तैनात की हैं। खोजी कुत्ते और बचाव उपकरण भी भेजे हैं। एक बचावकर्मी ने बताया कि ड्रोन से शुरुआती जांच के बाद पता चला कि सीमा तक जाने वाली सभी सड़कें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं।

लगातार बारिश हो रही है, इसलिए पानी का स्तर कभी भी बढ़ सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और उन्हें बचाने के लिए हर संभव कोशिश करने का आदेश दिया है। उन्होंने निगरानी व शुरुआती चेतावनी को मजबूत करने और वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

चीन के बेवकूफी पर जाएगा दुनिया का ध्यान : ब्रह्मा चेलानी

रणनीतिक विचारक, लेखक और टिप्पणीकार डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि हिमालय दुनिया की सबसे बड़ी भूकंप-सक्रिय पर्वतमाला है। यहां विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं। नेपाल में आई बाढ़ से यह बात साफ हो गई कि कैसे भूकंप की एक मामूली घटना भी बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है।

तिब्बत-नेपाल सीमा पर आए 4.4 तीव्रता के भूकंप ने ऐसी आपदा पैदा की कि अचानक आई बाढ़ में नेपाल के कई गांव बह गए। इस घटना से दुनिया का ध्यान फिर से चीन की उस बेवकूफी पर जाएगा, जिसके तहत वह हिमालय के भूकंप-संवेदी इलाके में दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है।

भारत-तिब्बत सीमा के पास बन रहा यह प्रोजेक्ट एक वाटर बम जैसा है, जो भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को डुबो सकता है और आगे चलकर बांग्लादेश में भी भारी तबाही मचा सकता है।

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