नेपाल में बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के कम से कम 77 तीर्थयात्री लापता हो गए हैं।
सद्गुरु ने खुद को बचाव अभियान में शामिल होने के लिए तैयार बताया है। इसी आपदा में कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय समूह भी संपर्क से बाहर है।
सद्गुरु ने दी जानकारी
सद्गुरु ने ऑनलाइन पोस्ट में बताया कि उनका दल तिब्बत के कैलाश मानसरोवर से लौटते समय ग्यिरोंग (तिब्बत) के आव्रजन कार्यालय में था।
उन्होंने वीडियो साझा करते हुए कहा कि चीन के तिब्बत में ग्यिरोंग में एक भयानक और दुखद बाढ़ आई है। हमारे कैलाश समूह का एक सदस्य इसमें फंस गया। वापस लौटते समय वे आव्रजन कार्यालय में थे जब बाढ़ आई और इमारत और शहर का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया।
वीडियो में तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में विशाल लहर उठती दिख रही है, जो आव्रजन कार्यालय पर गिरती है और फिर रसुवा की ओर बढ़कर भोटे कोशी नदी के किनारे तबाही मचाती है।
सद्गुरु ने कहा कि आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों के ठिकाने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उनके स्वयंसेवक और सहायता दल व्यथित हैं और बचाव में मदद की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हम अधिकारियों के साथ मिलकर घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं और बचाव प्रयासों में शामिल होने को तैयार हैं, चाहे कितना भी जोखिम हो।
सद्गुरु के अनुसार, उनकी यात्रा के 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। 743 लोग तिब्बत में और 148 नेपाल में हैं। तीन स्वयंसेवक नेपाल के तिमुरे में हैं।
आव्रजन कार्यालय में मौजूद ये 77 लोग नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा लापता बताए गए 105 भारतीय कैलाश तीर्थयात्रियों में शामिल माने जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कुल कम से कम 384 यात्री लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली शामिल हैं।