सुप्रीम कोर्ट सोमवार को झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज (JCCS) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई से स्वतंत्र और समय-सीमा के भीतर जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा वी मोहन की पीठ हरिशरण देवगन की ओर से दायर की गई याचिका को देखेगी। याचिका में झारखंड संयुक्त सिविल सेवाएं प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा–2025 की अखंडता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के संबंध में गंभीर चिंताओं का उल्लेख किया गया है।
CBI जांच की मांग
इसमें राज्य सीआईडी से जांच को सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की गई है ताकि अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
परीक्षा की शृंखलाबद्ध जांच जरूरी- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता का कहना है कि आरोपों की जांच के लिए पूरी परीक्षा की शृंखलाबद्ध जांच जरूरी है। इसमें प्रश्न पत्रों की तैयारी, परीक्षा का संचालन और परिणाम का प्रकाशन शामिल हैं। सभी फिजिकल और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है।
केवल आरोपों के आधार पर परीक्षा को रद करना उचित नहीं- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि केवल आरोपों के आधार पर परीक्षा को रद करना उचित नहीं है। मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।