ट्रफल, कस्टर्ड और आर्टिचोक… 128 साल पुराने शाही भोज का मेन्यू वायरल, बड़ौदा के महाराजा ने मेहमानों को दिया था यह खास दावत…

इतिहास के पन्नों में कभी-कभी ऐसे खजाने मिल जाते हैं, जिनपर आंखों को यकीन नहीं होता। एक प्रसिद्ध इतिहासकार ने एक ऐसा ही फ़ूड मेन्यू ढूंढ निकाला है, जो करीब 128 साल पुराना है। आइये समझते हैं किसके लिए आयोजित किया गया था यह शाही डिनर?

मुगल दक्षिण एशिया की एक्सपर्ट इतिहासकार नेहा वर्मानी ने हाल ही में 128 साल पुराने फ़ूड मेन्यू की एक रेयर तस्वीर शेयर की है।

अभिलेखागारों में खोजबीन के दौरान, उन्हें 31 जनवरी 1897 का एक मेन्यू मिला, जो बड़ौदा के महाराजा द्वारा ग्वालियर के महाराजा सिंधिया के सम्मान में आयोजित किया गया था।

128  साल पुराना शाही डिनर मेन्यू सामने आया

यह आयोजन ब्रिटिश काल के गुजरात स्थित लक्ष्मी विलास पैलेस में हुआ था। यह मेन्यू ‘फ्रेंच हाउते कुजीन’ का हिस्सा था, जिसमें भारतीय राजघरानों की अनोखी झलक देखने को मिली।

वर्मानी ने इसे कैप्शन दिया, ‘ग्वालियर के महाराजा के लिए बड़ौदा के महाराजा द्वारा होस्ट किए गए 19वीं सदी का डिनर, जैसा आप उम्मीद नहीं करेंगे, जिसमें ट्रफल्स, आर्टिचोक और बहुत सारे फैंसी फ्रेंच नाम और सामान होंगे।’ वे बिल्कुल सही हैं। इस मेन्यू से पता चलता है कि उस शाम मेहमानों को क्या-क्या परोसा गया।

फूड मेन्यू में क्या था?

इओटेज डी’अमांडेस: बादाम का कस्टर्ड या फ्लान

पोइसन ब्रेज़ सॉस मेयोनेज: रिच मेयोनेज सॉस के साथ ब्रेज़्ड मछली

क्रीम डे वोले ट्रफस: ट्रफल्स से भरपूर चिकन क्रीम सूप

कोटेलेट्स डे माउटन ए ल’इटालियन: इटैलियन स्टाइल में तैयार लैंब कटलेट, हर्ब्स और मसालों के साथ

सेले डे पेर्ड्रू रोटी ऑक्स पेटिट्स पोइस:  ताजे मटर के साथ भुने तीतर

फोंड्स डी’आर्टिचॉट्स ए ला डेमी-ग्लेस:  आर्टिचोक के निचले हिस्से को फ्रेंच ब्राउन सॉस में उबाला

करी डे मैसेडोइन डे लेग्यूम्स एट रिस:  सब्जी और चावल की करी

पोम्स ए ला क्रीम: क्रीमी सेब, उबले या बेक किए हुए

ग्लेस डे पिस्ताचू: पिस्ता आइसक्रीम

यूजर्स के मजेदार रिएक्शन हुए वायरल 

इस फ़ूड मेन्यू के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने एक से बढ़कर एक रिएक्शन दिया। एक यूजर ने कहा,’फ्लोरेंस में पलाज़ो पिट्टी घूमने के बाद मुझे एहसास हुआ कि भारतीय प्रिंस पश्चिमी अमीर लोगों की तरह रहते थे।

क्योंकि इसने मुझे राजस्थान के उन महलों की याद दिला दी, जहां मैं बड़ा होकर गया था। साथ ही, उनमें से कुछ आइटम भारतीय आइटम हैं जिनके बारे में फ्रेंच में बताया गया है।’

एक अन्य ने लिखा,’ऐसी दावतों का मकसद चकाचौंध करना करना था।’किसी ने लिखा, ’31-1-97 का मतलब मेरे लिए हमेशा 1997 होता था। 1897 मेरी सोच से भी परे है।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *