Amit Shah ने निर्देश दिए हैं कि घुसपैठियों के पूरे इकोसिस्टम पर कार्रवाई की जाए, जिसमें फंडिंग रोकने, पहचान करने और प्रभावी कदम उठाने तक के उपाय शामिल होंगे…

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह देश में अवैध घुसपैठ के पूरे इकोसिस्टम पर प्रहार करने की तैयारी में जुट गए हैं।

पिछले दिनों तीन दिनों की बिहार के सीमांचल की यात्रा के दौरान उन्होंने अधिकारियों के इसके स्पष्ट निर्देश दिए।

इसके तहत घुसपैठ के रास्तों की मैपिंग के साथ-साथ इस काम लगे मॉड्यूल पर शिकंजा, उनकी फंडिंग रोकना, अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की पहचान करना और सरकारी जमीनों को उनके अवैध कब्जे से मुक्त कराने जैसे कई कदम एक साथ उठाए जाएंगे।

अमित शाह ने की विस्तृत चर्चा

खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की मौजूदगी में सीमांचल के सातों जिलों के एसपी और डीएम के साथ अमित शाह ने घुसपैठ की समस्या के सभी आयामों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक के दौरान बिहार के गृह मंत्री व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

बैठक में घुसपैठ में जुटे संगठित गिरोह के शामिल होने की बात आई। बताया गया कि गिरोह से जुड़े कई लोगों ने अकूत संपत्ति बना ली है।

यही नहीं, घुसपैठ के साथ-साथ इलाके में सीमा पार से आने वाले नकली भारतीय करेंसी का धंधा भी चलता है। इलाके के ग्रामीण बैंक की शाखा बहुत बड़ी संख्या में हैं, लेकिन उनमें नोटों की गिनती मशीन नहीं होने के कारण नकली नोट बैंक सिस्टम में खपाए जाते हैं।

अवैध कब्जे के खिलाफ चलेगा अभियान

शाह ने युद्ध स्तर पर ग्रामीण सहित सभी बैंक शाखाओं में नोटों की गिनती मशीन लगाने का निर्देश दिया ताकि उसमें लगे यूवी रे की मदद नकली नोटों की पहचान हो सके। इसके साथ ही उन्होंने पूरे इलाके में हाई वैल्यू की संपत्ति की खरीद-फरोख्त के लिए एसडीओ से लेकर डीएम तक की अनुमति को अनिवार्य करने का भी निर्देश दिया।

बैठक में सरकारी जमीन पर बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठियों के कब्जे और उनपर बड़े निर्माण किये जाने की बात भी सामने आई।

शाह ने ऐसी सभी अवैध संपत्तियों की पहचान कर उनके ध्वस्तीकरण का अभियान चलाने को कहा। इसके साथ ही शाह ने ऐसे मतदाताओं के फिजिकल वेरीफिकेशन करने को भी कहा, जिन्हें एसआईआर के दौरान मृत या स्थायी तौर पर दूसरी जगह शिफ्ट हुआ बताया गया है।

माओवादी हिंसा पर लगाम लगाने में सफलता

दस्तावेजों की पड़ताल में पकड़े जाने के डर से बहुत सारे अवैध घुसपैठियों ने एसआईआर का फार्म ही नहीं भरा, जिसके कारण उन्हें मृत या स्थायी तौर पर दूसरी जगह शिफ्ट हुआ बता दिया गया। ऐसे घुसपैठियों की पहचान होने के बाद उन्हें सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने का काम शुरू किया जा सकता है।

दरअसल अमित शाह के नेतृत्व में पिछले सात सालों में कश्मीर में आतंकी हिंसा, पूर्वोत्तर भारत में अलगाववादी हिंसा और माओवादी हिंसा पर लगाम लगाने में सफलता मिली है।

इसके बाद शाह आंतरिक सुरक्षा के लिए एक चुनौती अवैध घुसपैठ की समस्या के समाधान की कोशिश शुरू कर दी है। सीमांचल से शुरू हुआ अभियान के अनुभवों के आधार पर इस अभियान को देश के दूसरों हिस्सों में शुरू किया जाएगा।

शाह ने पहले ही अवैध घुसपैठियों के खिलाफ डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट की मोदी सरकार की स्पष्ट नीति का एलान कर चुके हैं।

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