आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट को हरे पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं मिली, सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी करेगी निरीक्षण; इसके बाद होगा फैसला

सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने उप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन (यूपीएमआरसी) को आगरा कैंट स्टेशन से कालिंदी विहार तक दूसरे चरण के लिए पेड़ काटने की अनुमति प्रदान नहीं की है। यूपीएमआरसी ने 533 पेड़ों को बचाने के बदले में 523 पेड़ काटने की अनुमति मांगी है।

सीईसी की टीम पहले आगरा आकर निरीक्षण करेगी। उसके बाद ही पेड़ाें को काटने के आवेदन पर विचार किया जाएगा। यूपीएमआरसी द्वारा आगरा में मेट्रो के दो कारिडोर बनाए जा रहे हैं। पहला कारिडोर फतेहाबाद रोड से सिकंदरा तक और दूसरा कारिडोर आगरा कैंट स्टेशन से कालिंदी विहार तक बनना है।

यूपीएमआरसी, लखनऊ की कंपनी सचिव पुष्पा बेलानी ने सीईसी में 523 पेड़ काटने के लिए आवेदन किया हुआ है। यूपीएमआरसी का कहना है कि उसने पहले कारिडोर में 308 और दूसरे कारिडोर में 225 पेड़ों समेत कुल 533 पेड़ों को कटने से बचाया है। इन पेड़ों को बचाने के लिए उसे पेड़ काटने की अनुमति दी जाए।

वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की अनुशंसा के अनुसार डिवाइडर पर लगे फूलों और सजावटी 155 पौधों को ट्रांसलोकेट करने की अनुमति भी मांगी गई है। यूपीएमआरसी का कहना है कि पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिलने से दूसरे कारिडोर का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई जगह पर काम शुरू नहीं हो सका है।

परियोजना में विलंब की वजह से हो रही परेशानी की वजह से बाजार संघों, नगर निगम, क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा उस पर दबाव बनाया जा रहा है। सीईसी ने यूपीएमआरसी के पेड़ काटने के आवेदन पर 19 मई को सुनवाई की थी। इसमें यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार और परियोजना निदेशक अरविंद कुमार राय शामिल हुए।

सदस्य सचिव डा. सतीश सी. गरकोटी ने सुनवाई का कार्यवृत्त सोमवार को जारी कर दिया। सीईसी ने मेट्रो के पेड़ काटने के आवेदन से पूर्व स्थलीय निरीक्षण करने का निर्णय लिया है।

पर्यावरण कार्यकर्ता डा. शरद गुप्ता ने बताया कि मेट्रो को पेड़ काटने की अनुमति देने से पूर्व उसके द्वारा किए गए प्रतिपूरक पौधारोपण और काटे गए पेड़ों की जांच आवश्यक है। सीईसी को निरीक्षण में यह देखना चाहिए। डिवाइडर पर 20 फीट तक ऊंचे पेड़ लगे हैं, लेकिन उन्हें सजावटी पौधा बताया जा रहा है।

भरतपुर के मामले में मांगा संशोधित मानचित्र

ताज ट्रेपेजियम जोन में ताजमहल की पांच किमी की परिधि से बाहर 48 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई है। अधिवक्ता विवेक गुप्ता और गोविंद गुप्ता ने सीईसी से दो सप्ताह का समय मांगा। भरतपुर में वर्षा जल निकासी को नाला बनाने के लिए 51 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई है।

अधिवक्ता अनुपम किशाेर सिन्हा ने कहा कि मानचित्र सीईसी में प्रस्तुत किया जा चुका है। मानचित्र में काम के बारे में सटीक जानकारी नहीं होने से सीईसी ने संशोधित मानचित्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 50 से अधिक पेड़ काटने का मामला होने से सीईसी द्वारा निर्णय के लिए मामले को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

वहीं, मथुरा में एमआइएस इम्पैक्टम लैंड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पेड़ों को अवैध रूप से काटने का मामला भी सुना गया। संभागीय वन अधिकारी वेंकट श्रीकर पटेल ने भूमि की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की।

बैठक में यह प्रश्न उठा कि पेड़ों को भूमि के अधिग्रहण से पूर्व काटा गया था या उस समय जब भूमि वर्तमान इकाई के स्वामित्व में थी। पेड़ों की कटाई का समय पता लगाना आवश्यक है। समिति ने सेटेलाइट चित्रों, राजस्व व वन अभिलेखों की सावधानी से जांच करने को कहा। दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

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