एलन मस्क की कंपनी ‘स्पेसएक्स’ (SpaceX) के साथ प्रतिस्पर्धा की दौड़ में जेफ बेजोस की अंतरिक्ष उद्यम कंपनी ब्ल्यू ओरिजिन को बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को फ्लोरिडा में एक टेस्ट के दौरान कंपनी का ‘न्यू ग्लेन’ रॉकेट लॉन्चपैड पर ही भीषण विस्फोट के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
दरअसल, यह घठना उस वक्त हुआ जब रॉकेट का ‘हॉट-फायर’ टेस्ट किया जा रहा था। कंपनी के अनुसार, इस घटना में सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और तकनीकी विफलता (अनोमली) के कारणों की जांच की जा रही है।
फ्लोरिडा से स्पेस लॉन्च की लाइव स्ट्रीमिंग करने वाले यूट्यूब चैनल ‘नासास्पेसफ्लाइट’ (NASASpaceflight) द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, यह हादसा रात लगभग 2100 ET (0200 GMT) पर हुआ। वीडियो में देखा जा सकता है कि लॉन्चपैड पर मौजूद ‘न्यू ग्लेन’ रॉकेट ने जैसे ही आग पकड़ी, वह अचानक एक विशाल आग के गोले में तब्दील हो गया, इस भयानक विस्फोट के बाद आसमान में आग की लपटें और धुएं का एक ऊंचा गुबार उठता हुआ दिखाई दिया।
ब्लू ओरिजिन ने कहा कि उसे एक ‘एनोमली’ का अनुभव हुआ है, यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल रॉकेट कंपनियां आमतौर पर लॉन्च फेलियर या धमाके के लिए करती हैं।
हॉटफायर परीक्षण के दौरान हुई दुर्घटना
ब्लू ओरिजिन ने X पर जारी एक बयान में इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “आज के हॉटफायर परीक्षण के दौरान हमें एक असामान्य स्थिति का सामना करना पड़ा। सभी कर्मी सुरक्षित हैं। जैसे ही हमें और जानकारी मिलेगी, हम अपडेट प्रदान करेंगे।”
कंपनी ने कहा कि घटना की असली वजह जानना अभी जल्दबाजी होगी। बहुत मुश्किल दिन था, लेकिन जिसे भी बनाने की जरूरत है, हम उसे फिर से बनाएंगे और फिर से उड़ान भरेंगे।
मस्क के स्टारलिंक को चुनौती देने की थी तैयारी
ब्लू ओरिजिन ने बुधवार को कहा कि वह न्यू ग्लेन रॉकेट तैयार कर रहा है ताकि 48 अमेजन लियो सैटेलाइट को लो-अर्थ ऑर्बिट में लॉन्च किया जा सके, यह एलन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क को टक्कर देने के लिए एक ब्रॉडबैंड कॉन्स्टेलेशन बनाने की कोशिशों का हिस्सा है।
ब्लू ओरिजिन ने न्यू ग्लेन को डेवलप करने में अरबों डॉलर और लगभग एक दशक खर्च किया है। यह 29 मंजिला रॉकेट है, जिसका पहला स्टेज दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है और इसका मकसद स्पेसएक्स के फाल्कन फ्लीट और उसके ज्यादा पावरफुल स्टारशिप से मुकाबला करना है।
मस्क ने न्यू ग्लेन धमाके के एक वीडियो पर X पर जवाब देते हुए कहा, “बहुत बुरा हुआ। रॉकेट बहुत मुश्किल होते हैं।”