मनरेगा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) एप पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रखंड की हुसिया एवं करमा पंचायत में एनएमएमएस प्रणाली को दरकिनार कर मजदूरों की फर्जी हाजिरी बनाकर सरकारी राशि की निकासी किए जाने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि प्रखंड में कार्यरत एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने तकनीकी खामियों का लाभ उठाकर कई योजनाओं में फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान करा दिया। जानकारी के अनुसार एनएमएमएस एप के माध्यम से मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों की उपस्थिति जियो-टैग एवं टाइम-स्टैम्प के साथ दर्ज की जाती है।
इसका उद्देश्य फर्जी हाजिरी और भुगतान पर रोक लगाना है। बावजूद इसके हुसिया पंचायत के चोरहा गांव में वर्ष 2025 में स्वीकृत मिट्टी-मोरम सड़क निर्माण योजना संख्या 3417006013RC/7080901102802 में कथित रूप से बिना एनएमएमएस उपस्थिति के 23 मई से 29 मई तक नौ मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर दी गई।
आरोप है कि इसके आधार पर 15,510 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि संबंधित योजना में कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज ठाकुर की पत्नी सलोनी कुमारी मेठ के रूप में कार्यरत हैं।
योजना की प्राक्कलित लागत लगभग पांच लाख रुपये बताई गई है, जिसमें मजदूरी मद में 2.78 लाख रुपये और सामग्री मद में 1.33 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। आरोप है कि मजदूरी मद की पूरी राशि की निकासी भी की जा चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल सड़क योजना ही नहीं, बल्कि हुसिया एवं करमा पंचायत में संचालित कई ईसीबी तथा दीदी बाड़ी योजनाओं में भी इसी प्रकार फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान कराने की आशंका है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।