रामजन्मभूमि परिसर में मंदिरों का निर्माण पूरा हो जाने के बाद अब इनकी फिनिशिंग व साफ-सफाई भी समाप्त हो गई। परकोटे (चहारदीवारी) में चल रहे कार्य को भी कार्यदायी एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने पूरा कर लिया है। सप्ताह भर में इसे भी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को हस्तांतरित कर देने की तैयारी चल रही।
परकोटा ट्रस्ट को हैंडओवर हो जाने के बाद इसके मध्य बने पूरक मंंदिरों में दर्शन शुरू करने में आ रही बाधा समाप्त हो जाएगी। रामजन्मभूमि परिसर में निर्मित 18 मंदिरों काे एलएंडटी ने पहले ही ट्रस्ट को हैंडओवर कर दिया है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामजन्मभूमि परिसर में राम मंदिर के चारों ओर आठ एकड़ भू-भाग पर लगभग 732 मीटर लंबे परकोटे का निर्माण कराया है। परकोटे के मध्य ही अलग-अलग कोणों पर छह पूरक मंदिर भी निर्मित हुए हैं।
इसके अलावा परकोटे के बाहर शेषावतार लक्ष्मण जी का मंदिर बना है। साथ ही दक्षिणी हिस्से में रामायणकालीन सात ऋषियों-मुनियों के मंदिर निर्मित हैं। इन सभी मंदिरों में प्रतिमाओं की सामूहिक प्राण प्रतिष्ठा गत वर्ष पांच जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। इसी के साथ राम मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार को भी प्रतिष्ठित किया गया था।
राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने के बाद गत वर्ष 25 नवंबर को ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों ध्वजारोहण कराया था, परंतु परकोटे का निर्माण व मंदिरों की फिनिशिंग अवशेष रह जाने से इन पर ध्वजारोहण नहीं हो पाया था। जब मंदिरों की फिनिशिंग पूरी हुई तो परकोटे में शुरू कराई गई।
परकोटे में मंदिरों का निर्माण होने से इनमें दर्शन शुरू कराना संभव नहीं हो पा रहा था। अब न केवल दो पूरक मंदिरों के शिखर पर ध्वजारोहण हीे गया, बल्कि परकोटे की फिनिशिंग भी समाप्त हो गई है। ऐसे में अब पूरक मंदिरों में दर्शन की बाधा समाप्त हो गई है।
एलएंडटी के परियोजना निदेशक विनोद कुमार मेहता ने बताया कि परकोटे का संपूर्ण कार्य समाप्त हो गया है। इसे अगले सप्ताह तक ट्रस्ट को हैंडओवर कर दिया जाएगा। परिसर के 18 मंदिरों को पहले ही हस्तांतरित किया जा चुका है।
रामजन्मभूमि परिसर के 18 मंदिर
- राम मंदिर के भूतल पर रामलला व प्रथम तल पर राम परिवार का गर्भगृह।
- सात पूरक मंदिर (भगवान शंकर, गणेश, सूर्य, मां दुर्गा, मां अन्नपूर्णा, हनुमानजी व शेषावतार)।
- सप्तर्षि मंदिर (महर्षि वाल्मीकि, गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र, ऋषि अगस्त्य, माता अहिल्या, माता शबरी, निषादराज)।
- कुबेर टीले पर स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर।
- यात्री सुविधा केंद्र परिसर में स्थित संत तुलसीदास मंदिर।