काशी रेलवे स्टेशन पर 100 दिनों का मेगा ब्लॉक शुरू, एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस…

काशी रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह अपडेट किया जाएगा। वर्ष 2027 में यात्रियों की बेहतर सेवा के लिए कार्य में तेजी लाई जाएगी। रेल प्रशासन ने इसके लिए काशी रेलवे स्टेशन पर 100 दिनों का मेगा ब्लाक (छह जून से 13 सितंबर तक) लिया है।

इस निर्णय के बाद काशी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक और दो से ट्रेनें गुजारी जाने लगी हैं, जबकि प्लेटफार्म नंबर तीन और चार की रेल लाइनें उखाड़ी जा रही हैं। इस स्थिति में दो रेल लाइनों पर लगभग 154 यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का दबाव आने से एक मेमू ट्रेन को कैंसिल कर दिया गया है। वहीं, छह ट्रेनों का परिचालन पूर्व मध्य रेल के पंडित दीनदयाल जंक्शन से किया जा रहा है।

काशी रेलवे स्टेशन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए इसे एयरपोर्ट की तरह विकसित करने की योजना 2023 में बनाई गई थी। इसके अंतर्गत कांकोर्स भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें प्रथम और द्वितीय प्रवेश द्वार के भवनों की छतों को एक दूसरे से जोड़ा जाएगा।

यात्री ट्रेन के पहुंचने पर एस्केलेटर, सीढ़ियों और लिफ्ट के माध्यम से नीचे जा सकेंगे। यात्रियों का इंतजार प्रथम तल पर होगा, जहां सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वर्तमान में दोनों प्रवेश द्वारों पर तीन-तीन मंजिल के भवन तैयार हैं, जिन्हें जोड़ने के लिए मेगा ब्लाक लिया गया है।

काशी रेलवे स्टेशन को वर्ष 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। यहां यात्रियों की पहुंच बढ़ाने के लिए इसे राष्ट्रीय राजमार्ग 44 से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में काशी स्टेशन पर ढाई से तीन हजार यात्रियों का आवागमन होता है। भविष्य में यह कैंट (वाराणसी) रेलवे स्टेशन का सैटेलाइट स्टेशन बनेगा।

यहां ट्रेनों का ट्रैफिक बढ़ेगा, जिससे लोग यहीं से ट्रेन पकड़ना चाहेंगे। नेशनल हाईवे से जुड़ने पर यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। नए काशी स्टेशन पर चार की जगह छह प्लेटफार्म होंगे, जिससे ट्रेनों के ठहराव की गुंजाइश भी बढ़ेगी।

काशी स्टेशन पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा। इसका कारण यह है कि स्टेशन शहर के बाहरी छोर पर राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है। सड़क पार करते ही नमो घाट है, जिसे पहले से ही पर्यटन की दृष्टि से सजाया-संवारा गया है। यहां किसी घाट पर जाने के लिए जलयान के साथ ही काशी दर्शन के लिए हेलीपैड बनाए गए हैं।

स्टेशन की विशेषताएं
– रेलवे स्टेशन की दो एंट्री होगी।
– चार प्लेटफार्म अंडरग्राउंड होंगे।
– प्रथम तल पर यात्रियों के ठहरने, टिकट काउंटर आदि सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
– यात्री एस्कलेटर के माध्यम से अंडरग्राउंड प्लेटफार्म पर पहुंचेंगे।
– महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव बढ़ाए जाएंगे, और दो प्रवेश द्वार होंगे।

काशी रेलवे स्टेशन का मॉडल
– 13 सितंबर तक निर्माण कार्य, छह ट्रेनों का संचालन डीडीयू से।
– 154 यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के दबाव से एक मेमू ट्रेन कैंसिल।
– 1800 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी।
– 1100 स्क्वायर मीटर का होगा प्रथम तल।

100 दिनों का मेगा ब्लाक लिया गया है। कार्य पूर्ण करने का निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2027 को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। काशी रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी। कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। – बृजेश यादव, एडीआरएम वाराणसी लखनऊ।

जानिए कौन सी ट्रेन कैंसिल और कौन शार्ट टर्मिनेट:
63233 पटना-वाराणसी मेमू पीडीडीयू से जाएगी। 63226 वाराणसी-पटना मेमू डीडीयू तक ही आएगी। 63229/63230 आरा-वाराणसी मेमू कैंसिल रहेगी। 13343/13344 शक्तिनगर-वाराणसी डीडीयू से चलेगी। 13345/13346 सिंगरौली-वाराणसी मेमू डीडीयू से चलेगी।

10,000 स्क्वायर मीटर का होगा संपूर्ण रेलवे स्टेशन परिसर। नए मालवीय पुल से इंटरकनेक्ट होगा स्टेशन। पुनर्विकास के बाद काशी रेलवे स्टेशन से कुल 10 रेल ट्रैक होंगे। सभी रेल ट्रैक नए राजघाट पुल से इंटरकनेक्ट होंगे। रेलवे ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे राजघाट पुल (मालवीय पुल) का निर्माण 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

वर्ष 2027 में स्टेशन और वर्ष 2029 में नए राजघाट पुल के निर्माण के बाद पूर्वांचल की कनेक्टिविटी बिहार, झारखंड और बंगाल के साथ मजबूत होगी। नए राजघाट पुल से चार रेल ट्रैक (पूर्व में दो रेल ट्रैक) और सिक्स लेन सड़क मार्ग (पूर्व में टू लेन) से सड़क और रेल दोनों परिवहन में जबरदस्त सुधार होगा।

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