‘सबूत कमजोर पड़ें तो सख्त कानून भी बेअसर’, POCSO मामले में SC की अहम टिप्पणी; आरोपी बरी…

सुप्रीम कोर्ट ने ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज’ (POCSO) एक्ट के तहत एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी को दोषी मानने की सख्त व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि ट्रायल कोर्ट अभियोजन पक्ष के मामले को ‘अटल सत्य’ मान लें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘कानूनी अनुमानों का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में अभियोजन पक्ष की बात ही परम सत्य हो और आरोपी के पक्ष के सबूत मायने ही न रखें।’ सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला नौ आपराधिक कानूनों पर असर डालेगा।

जस्टिस मिश्रा और जस्टिस अंजारिया ने कहा, ‘अदालत को दोषी होने के अनुमान से जुड़े प्रावधानों के आधार पर अभियोजन पक्ष के दावों को आंख बंद करके स्वीकार नहीं करना चाहिए और न ही हर मामले में अभियोजन पक्ष की कहानी बेतुकी या असंभव होने पर भी उसे मंज़ूरी देनी चाहिए।’

आरोपी को दोषी मानने की अवधारणा पर SC ने किया प्रश्न

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह फैसला दिल्ली की एक अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट के उन फैसलों को रद करते हुए सुनाया, जिनमें एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था।

व्यक्ति पर एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसने 2015 में दक्षिण दिल्ली की कालकाजी झुग्गी बस्ती में उसकी नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न किया था।

कोर्ट ने कहा कि  महिला ने यह आरोप इसलिए लगाया था, क्योंकि पानी को लेकर महिला और उस व्यक्ति के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले पर उठे सवाल

बेंच ने कहा कि ऐसा लगता है कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ही POCSO एक्ट में आरोपी को दोषी मानने की धारणा वाली व्यवस्था से प्रभावित थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने ही मां के बयान में मौजूद बड़ी कमियों और खामियों को नजरअंदाज कर दिया, जबकि आरोपी ने जिरह (cross-examination) के दौरान इन बातों को उजागर किया था।

जस्टिस अंजारिया ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘POCSO एक्ट में आरोपी को दोषी मानने की धारणा का मतलब यह नहीं है कि आरोपी के पक्ष में मौजूद सबूतों को खत्म कर दिया जाए।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘कानूनी अनुमानों का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में अभियोजन पक्ष की बात को ही परम सत्य मान लिया जाए। अनुमान से जुड़े प्रविधान अदालतों को किसी खास मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर सबूतों का विश्लेषण करने की अपनी जरूरी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकते।’

9 कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

इस फैसले का असर POCSO एक्ट में  आरोपी को दोषी मानने की सख्त व्यवस्था समेआठ अन्य कानूनों में आरोपी के दोषी होने के अनुमान या उन पर ‘रिवर्स बर्डन’ (साबित करने की उल्टी जिम्मेदारी) डालने वाले प्रविधानों पर पड़ सकता है।

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम और परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), जिनका 42 पन्नों के फैसले में खास तौर पर जिक्र किया गया था।

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