नितिन गडकरी बोले- कंपनियों की खराब डीपीआर सड़क हादसों के लिए जम्मेदार…

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने सोमवार को अपने एक बयान में कुछ सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) के लिए खराब परियोजना रिपोर्ट को जिम्मेदार ठहराया।

गडकरी ने कहा कि कंपनियों को राजमार्गों और अन्य सड़कों के निर्माण से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detail Project Report) तैयार करने के लिए उचित ट्रेनिंग की जरूरत है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री ने कहा कि सरकार नई प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।

गडकरी ने कहा, “शुरुआत वहां से करो। अगर वो सुधरेंगे नहीं तो तुम्हारा पूरा सत्यानाश हो जाएगा।” हल्के-फुल्के अंदाज में मंत्री ने कहा कि अकुशल चालक के हाथ में नई मर्सिडीज कार भी समस्या खड़ी कर सकती है।

गडकरी ने सड़क परियोजनाओं में देरी के कारणों की पहचान करने पर जोर दिया, क्योंकि देरी के कारण निर्माण की बढ़ती लागत भी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।

साइरस मिस्त्री की मौत के बाद गडकरी का वीडियो हो रहा वायरल
टाटा ग्रुप में पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क हादसे में मौत के बाद कार सेफ्टी को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इसी साल फरवरी में मीडिया से बातचीत करते हुए गडकरी ने जिक्र किया था कार में 6 एयरबैग्स का होना क्यों जरूरी है और सीट बेल्ट को लेकर लोग कितनी लापरवाही बरतते हैं।

आपको बता दें कि साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry)जिस कार में सवार थे, वो लगभग 70 लाख रुपये की मर्सिडीज थी। उसमें काफी सेफ्टी फीचर्स आते हैं। पिछली सीट पर बैठे मिस्त्री ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, जिस वजह से उनके सिर पर चोट आई और उनकी मौत हो गई।

कुछ राज्यों में सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता
कुछ राज्यों में सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए गडकरी ने कहा कि राज्य सरकारें हर साल सड़कों की मरम्मत के लिए 10,000-15,000 करोड़ रुपए खर्च कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “हर दो-तीन साल में हम सड़कों के रखरखाव पर पैसा खर्च कर रहे हैं…हम अपना पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं।”

2021 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1।55 लाख से अधिक लोगों की जान गई
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में पूरे भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1।55 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई।

इस तरह औसतन रोजाना 426 या हर घंटे में 18 लोगों की मौत हुई ,जो अब तक किसी भी कैलेंडर वर्ष में दर्ज सर्वाधिक मौत का आंकड़ा है।

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले एनसीआरबी की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले साल दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों की संख्या भले ही सर्वाधिक थी, लेकिन पूर्व के वर्षों की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं और घायल लोगों की संख्या में कमी दर्ज की गई।

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