अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों में भारतीय-अमेरिकी वोटर डेमोक्रेटिक पार्टी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हाल ही में एशियाई और प्रशांत द्वीपसमूह अमेरिकी समुदायों के बीच एक सर्वे में यह बात सामने आई है।
एशियन एंड पैसिफिक आइलैंडर अमेरिकन वोट और AAPI डेटा के इस सर्वे से पता चलता है कि ये लोग 3 नवंबर को होने वाले चुनाव में भारी संख्या में वोट डालने की तैयारी कर रहे हैं।
यह चुनाव 435 संसदीय, 35 सीनेट सीटों और कई स्थानीय पदों के लिए होगा। अनुमान के मुताबिक, 2026 में लगभग 1.6 करोड़ एशियाई-अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह के नागरिक वोट देने के योग्य हैं।
90 प्रतिशत से ज्यादा वोटर डालेंगे वोट
सर्वे के अनुसार, 90 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्टर्ड एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह वोटर इस चुनाव में अपना वोट जरूर डालेंगे। खास बात यह है कि दोनों पार्टियों ने इन वोटरों तक पहुंचने की बहुत ज्यादा कोशिश नहीं की है, फिर भी लोगों में वोट डालने को लेकर भारी उत्साह है।
सर्वे में शामिल 42 प्रतिशत वोटरों ने बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी के किसी भी नेता या कार्यकर्ता ने उनसे चुनाव के बारे में बात करने के लिए संपर्क नहीं किया। वहीं, 58 प्रतिशत लोगों ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से भी उन्हें कोई संदेश या फोन नहीं आया है। नेताओं के इस ठंडे रवैये के बावजूद वोटर चुनाव को लेकर जागरूक हैं।
कौन-सी पार्टी है पहली पसंद?
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी वोटर कांग्रेस और सीनेट, दोनों चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देना चाहते हैं। दूसरी ओर, संसदीय चुनावों में 18 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को वोट देने की बात कही है। सीनेट चुनाव के लिए यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादा है, जहां 22 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन कर रहे हैं।
जब इन वोटरों से राजनीति में उनकी दिलचस्पी के बारे में पूछा गया, तो 66 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे राजनीति से गहराई से जुड़े हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि राजनीति के बारे में सोचकर उन्हें दिमागी तौर पर बहुत थकान महसूस होती है।
रिसर्च संस्था AAPI डेटा के संस्थापक कार्तिक रामकृष्णन ने कहा कि एशियाई अमेरिकी देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले वोटर हैं। इसलिए, यह जानना बहुत जरूरी है कि कौन सी बातें उन्हें घरों से बाहर निकलकर वोट देने के लिए प्रेरित करती हैं।
महंगाई और स्वास्थ्य सबसे बड़े मुद्दे
एशियाई अमेरिकी वोटरों के लिए महंगाई और रोजमर्रा के खर्चे सबसे बड़ा मुद्दा है। करीब 90 प्रतिशत लोगों ने इसे सबसे जरूरी मुद्दा माना है। इसके अलावा, 82 प्रतिशत लोगों के लिए हेल्थकेयर, 80 प्रतिशत के लिए नौकरी और बेरोजगारी, 80 प्रतिशत के लिए सामाजिक सुरक्षा और 79 प्रतिशत के लिए शिक्षा बहुत अहम हैं।
यह सर्वे कुल 2,066 रजिस्टर्ड वोटरों के बीच किया गया था, जिसमें 1,896 एशियाई अमेरिकी, 242 भारतीय-अमेरिकी और 170 प्रशांत द्वीपसमूह के वोटर शामिल थे।