प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि देश ने पिछले आठ दशकों में कई कठिन चुनौतियों को पार किया है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने युवा विधि स्नातकों और वकीलों से भविष्य की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित ध्वजारोहण समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआइ ने कहा कि किसी राष्ट्र की यात्रा उसकी उपलब्धियों के साथ समाप्त नहीं होती।
हर उपलब्धि अपने साथ जिम्मेदारी और कर्तव्य का नया अहसास भी लेकर आती है। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और आगे की यात्रा में कई मील का सफर तय करना है। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ न्यायाधीश, वकील और अदालत के कर्मचारी उपस्थित थे।
युवा वकीलों को संबोधित करते हुए सीजेआइ ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से बार ने जो जिम्मेदारी संभाली है, वह जल्द ही उनके कंधों पर होगी। आपसे पहले की पीढ़ियों ने न्याय की जिन संस्थाओं का निर्माण और इन्हें सुदृढ़ किया है, अब उनकी रक्षा करना और उन्हें आगे बढ़ाना आपकी जिम्मेदारी है।
सीजेआई ने कहा कि आधुनिक भारत के दो महानतम निर्माताओं महात्मा गांधी और बीआर आंबेडकर के अलावा सरदार वल्लभभाई पटेल, मोतीलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक और लाला लाजपत राय भी वकील थे। यह दर्शाता है कि कानूनी पेशा भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महज मूक दर्शक नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा था।