पश्चिम एशिया के अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक बार फिर राष्ट्रहित में पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद्य तेल, उर्वरक आदि की खपत कम करने से लेकर वर्क फ्रॉम होम और स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात इस दशक के बड़े संकटों में से एक हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि देश ने जैसे कोविड महामारी की चुनौती से पार पाया था, वैसे ही इस संकट से भी उबर जाएगा। प्रधानमंत्री की ओर से इस अपील के बाद विभिन्न मंत्रालयों ने भी उनकी मंशा को अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है।
पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने पर मंत्रालयों में मंथन
मंत्रालयों में मंथन चल रहा है और प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं कि किस तरह वे पेट्रोल-डीजल आदि की खपत कम करने में सहयोग कर सकते हैं। संभावना है कि ऐसे व्यावहारिक प्रस्तावों के आधार पर जल्द ही सरकारी विभागों के लिए केंद्रीय स्तर पर कुछ निर्णय या दिशा-निर्देश जारी हों।
प्रधानमंत्री ने सोमवार को वडोदरा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन व इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने सोने की खरीदारी टालने, विदेश से आने वाले उत्पादों पर खर्च कम करने और वोकल फॉर लोकल मंत्र का पालन करने की अपील दोहराई।
अस्थिर हालात से गुजर रही दुनिया- पीएम
उन्होंने कहा कि दुनिया पिछले कुछ वर्षों से लगातार अस्थिर हालात से गुजर रही है। पहले कोविड का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौती और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव। इन सभी हालात का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आयातित वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी बुरी तरह से बाधित हुई हैं।
भारत विदेश से कई उत्पादों का आयात करने के लिए लाखों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च करता है, इसलिए देशवासियों को विदेश से आने वाले उत्पादों का इस्तेमाल कम करना चाहिए और रोजमर्रा की जिंदगी में आयातित वस्तुओं पर बेवजह निर्भरता से बचना चाहिए।
ऐसे निजी कामों से भी बचना चाहिए जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है। विदेश जाकर थीम वेडिंग करने के बजाय देश में विवाह करें। शैक्षणिक संस्थान व स्कूल ऑनलाइन शिक्षा को अपनाएं। सरकार भी लगातार कोशिश कर रही है कि देश के लोगों पर इसका असर कम से कम हो।
पूर्व में सरकार की अपील पर नागरिकों ने निभाई है जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले के दशकों में भी जब भी देश युद्ध या किसी और बड़े संकट से गुजरा है, तो सरकार की अपील पर हर नागरिक ने इसी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
आज भी हम सभी को एक साथ आकर देश के संसाधनों पर बोझ कम करने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की जरूरत है। जैसे हर बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही हर छोटी और बड़ी कोशिश मायने रखती है। जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक छोटे-छोटे, लेकिन सार्थक कदम देश के हित में होंगे।
अपनी कार्यशैली से उदाहरण प्रस्तुत करेगी सरकार
प्रधानमंत्री मोदी की अपीलों के बीच सरकार अपने स्तर से ईंधन आपूर्ति के अन्य विकल्पों पर काम कर रही है। एलपीजी का संकट देखकर पीएनजी कवरेज बढ़ाया जा रहा है। चूंकि, इन हालात का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना संभावित है, इसलिए अब सरकार पहले से अधिक अलर्ट मोड में आती दिख रही है। अब यह जनता के विवेक पर निर्भर है कि वह प्रधानमंत्री की अपील को कितनी गंभीरता से लेती है।
माना जा रहा है कि सरकार अपनी कार्यशैली से जनता के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों ने विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। वे आकलन कर रहे हैं कि अभी उनके मंत्रालयों द्वारा प्रतिदिन कितना ईंधन खर्च किया जा रहा है और वह इसे कितना कम कर सकते हैं।
चूंकि, प्रधानमंत्री ने वर्क फ्रॉम होम का विकल्प भी सुझाया है तो इस पर भी विचार चल रहा है। मंत्रालय जल्द ही प्रस्ताव बनाकर सरकार को सौंपेंगे, जिसके बाद सभी सरकारी विभागों के लिए दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना है।
मंत्रालय इन प्रस्तावों पर कर रहे विचार
- मंत्रियों के कारों के काफिले में वाहनों की संख्या सीमित की जाए।
- निजी वाहनों से आने वाले सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को कार-पूलिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- मंत्रालयी कर्मचारियों के कार्यालय आवागमन के लिए कुछ मार्गों पर इलेक्टि्रक बसों का संचालन किया जाए।
- कोविड काल की तरह कर्मचारियों का रोस्टर बनाकर वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
- मंत्रियों-अधिकारियों के दौरों की संख्या घटाकर फिलहाल वर्चुअल मीटिंग पर जोर दिया जा सकता है।