‘होर्मुज पर किसी का कंट्रोल बर्दाश्त नहीं, वरना उड़ा देंगे’: US-ईरान बातचीत के बीच ओमान को ट्रंप की चेतावनी…

अमेरिका ईरान में चल रही तनावपूर्ण बातचीत के बीच ट्रंप ने अब ओमान को भी धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ओमान को सीधी चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने के मामले में दखल देने की कोशिश न करे, वरना ‘उड़ा दिया जाएगा’।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या वह होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण रखने वाले किसी समझौते को स्वीकार करेंगे तो उन्होंने चेतावनी दी कि इस पर किसी भी देश का कंट्रोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोई भी देश कंट्रोल नहीं करेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है। हम इस पर नजर रखेंगे। लेकिन कोई भी देश इसे कंट्रोल नहीं करेगा। यह हमारी बातचीत का ही एक हिस्सा है। ओमान को भी बाकी सबकी तरह ही बर्ताव करना होगा, वरना हमें उन्हें उड़ाना पड़ेगा।”

ट्रंप का यह तीखा बयान उस कथित ईरान-US समझौते के मसौदे के सामने आने के बाद आया है, जिसमें इस अहम जलमार्ग का कंट्रोल ईरान और ओमान को सौंपने की बात कही गई थी, जिसे अमेरिका ने पूरी तरह ‘मनगढ़ंत’ बताकर खारिज कर दिया है।

होर्मुज को लेकर ईरान से संपर्क में है ओमान

ओमान, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंताओं को लेकर ईरान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है। इससे पहले 24 मई को, विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी के नेतृत्व में ओमान के अधिकारियों ने, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी के नेतृत्व वाले एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नौवहन की स्वतंत्रता और हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर बातचीत की।

ओमान के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, इस रणनीतिक जलमार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों पर चर्चा की। बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने हाल के घटनाक्रमों के आलोक में विचारों का आदान-प्रदान किया और समुद्री नौवहन, व्यापार प्रवाह और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बै

बैठक के दौरान, अल बुसैदी को ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से, चल रही ईरान-अमेरिका वार्ता के संबंध में एक मौखिक संदेश प्राप्त हुआ। इस संदेश में, होर्मुज स्ट्रेट से होकर नौवहन की स्वतंत्रता को सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से बहाल करने के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।

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