अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन जन्मजात नागरिकता को रोक लगाने के आदेश पर साइन किया था। लेकिन निचली अदालतों ने इस आदेश को पहले ही रोक दिया था।
अब उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान जजों ने संविधान की व्याख्या पर गंभीर सवाल खड़े किए। अमेरिका में जन्मजात नागरिकता को सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश पर अब सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई है।
सुनवाई के लिए ट्रंप खुद पहुंचे कोर्ट
ट्रंप अमेरिकी इतिहास में पहले मौजूदा राष्ट्रपति बने, जो सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में करीब एक घंटे तक मौजूद रहे। 1 अप्रैल 2026 को हुई इस सुनवाई में जजों ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति अकेले ही 14वें संशोधन और 125 साल पुरानी कानून को बदल सकते हैं।
जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने सवाल किया कि क्या सरकार डिलीवरी रूम में बैठकर फैसला करेगी कि किस बच्चे को नागरिकता मिलेगी? अन्य जजों ने भी इस बात पर जोर दिया कि जन्म के आधार पर नागरिकता अमेरिकी संविधान का मूल सिद्धांत है, जिसे कांग्रेस या अदालतों के बिना राष्ट्रपति नहीं बदल सकते।