भारत में पेपर लीक की समस्या एक राष्ट्रीय संकट बन चुकी है, जो लाखों छात्रों के मेहनत पर पानी फेर देती है।
हाल में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया है, जिसके बाद परीक्षा को रद करना पड़ा है।
भारत में हर साल किसी न किसी परीक्षा का पेपर लीक ही हो जाता है, लेकिन अमेरिका और चीन जैसे देशों ने ऐसा सिस्टम बनाया है, जहां पेपर लीक होना लगभग असंभव माना जाता है।
ऐसे में चलिए जानते हैं अमेरिका, चीन समेत दुनिया के बाकी देशों में किस तरह से परीक्षाएं कराई जाती हैं, जिससे वहां पेपर लीक नहीं होता है और क्या इन देशों के सिस्टम से भारत को भी सीखने की जरूरत है।
दरअसल, दुनिया भर के देश स्नातक चिकित्सा प्रवेश के लिए अलग-अलग मॉडल अपनाते हैं। अमेरिका, कनाडा और अमेरिकी क्षेत्रों के अधिकांश मेडिकल स्कूलों में एडमिशन के लिए एमसीएटी की परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। यह परीक्षा विकास एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन मेडिकल कॉलेजेस (एएएमसी) द्वारा किया जाता है।
अमेरिका में क्यों नहीं लीक होता पेपर?
अमेरिका में MCAT परीक्षा सुरक्षित परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल रूप से आयोजित की जाती है। जिसके चलते प्रश्न पत्रों के भौतिक परिवहन से जुड़े जोखिम कम हो जाते हैं और रिजल्ट प्रकिया में आसानी होती है। सभी परीक्षार्थियों को एक ही प्रश्न पत्र नहीं मिलता, क्योंकि प्रश्न पत्रों का संग्रह बड़ा होता है, जिससे बड़े पैमाने पर प्रश्न पत्रों के लीक होने की संभावना कम हो जाती है।
सबसे खास बात यह है कि यह परीक्षा एक ही दिन में होने वाली राष्ट्रीय परीक्षा के बजाय साल में कई अलग-अलग तारीखों पर आयोजित की जाती है। इससे छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम होता है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का प्रभाव कम हो जाता है।
MCAT एक 6 घंटे 15 मिनट की कंप्यूटर-आधारित परीक्षा है। इसमें वर्बल रीजनिंग, बेसिक सेन्स और रिटेन एग्जाम शामिल है। इसे सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। MCAT 2026 के लिए पंजीकरण शुल्क 355 डॉलर है। अमेरिका, कनाडा या अमेरिकी क्षेत्रों से बाहर के छात्रों को पंजीकरण राशि के अतिरिक्त 130 डॉलर का अंतर्राष्ट्रीय शुल्क देना होता है।
चीन में कैसे होती हैं परीक्षा?
चीन की राष्ट्रीय कॉलेज परीक्षा Gaokao यानी ‘गाओकाओ’ में हर साल करोड़ों स्टूडेंट्स शामिल होते हैं। इसी परीक्षा के रैंक के आधार पर उन्हें टॉप यूनिवर्सिटीज में एडमिशन मिलता है। चीन में होने वाली गाओकाओ की परीक्षा के दौरान सुरक्षा इतनी सख्त होती है कि कई शहरों में ट्रैफिक तक रोक दिया जाता है, ताकि छात्र समय पर परीक्षा केंद्र पर पहुंच सकें।
जेल में प्रिंट होते हैं पेपर
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, प्रश्नपत्र शिक्षा मंत्रालय और नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन की निगरानी में जेलों में प्रिंट किए जाते हैं। हर प्रिंट वर्कशॉप में कैमरे और गार्ड जैसे 24 घंटे सुरक्षा के कई तरीके होते हैं। इस दौरान सुरक्षा के उच्चतम मानदंडों का पालन किया जाता है। पेपर प्रिंट करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता है और उनकी सख्त निगरानी होती है।
गाओकाओ की परीक्षा के प्रश्न पत्रों की सुरक्षा करेंसी से भी अधिक सख्त होती है। इसे पूरे देश में हथियार बंद गार्ड की सुरक्षा में ले जाया जाता है। जिन वाहनों से प्रश्न पत्रों को परीक्षा केंद्र पर ले जाया जाता है, उसमें सैटेलाइट नेविगेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं। वाहनों के ड्राइवर एग्जाम अथॉरिटी के अधिकारी और पुलिस-मिलिट्री के लोग होते हैं।
यह दुनिया की सबसे बड़ी व्यवस्थित परीक्षाओं में से एक है। यह परीक्षा जून में शैक्षणिक सत्र के अंत में दो दिनों तक चलती है। इसे पूरा करने में लगभग नौ घंटे लगते हैं। छात्रों की तीन अनिवार्य विषयों – चीनी, अंग्रेजी और मैथ में परीक्षा ली जाती है। गाओकाओ परीक्षा की फीस लगभग 200 युआन है। अंतरराष्ट्रीय छात्र गाओकाओ के लिए आवेदन नहीं कर सकते।
साउथ कोरिया में कैसे होती है परीक्षा?
साउथ कोरिया में होने वाली कॉलेज शैक्षिक योग्यता परीक्षा संभवतः दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। यह हर साल नवंबर महीने में आयोजित की जाती है। आठ घंटे की यह परीक्षा दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालयों द्वारा मान्यता प्राप्त है और विश्वविद्यालय में दाखिले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साउथ कोरिया में मेडिकल कार्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए आवेदकों को शीर्ष 0.01%–0.8% अंक प्राप्त करने होते हैं।
साउथ कोरिया में सख्त और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के माध्यम से प्रश्नपत्रों के लीक होने की संभावना को कम से कम किया जाता है। प्रश्न पत्र लीक होने से बचाने के लिए परीक्षा से एक महीने पहले प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षकों और प्रोफेसरों को एक सुरक्षित स्थान पर अलग-थलग रखा जाता है। प्रश्न पत्र बनाने वाले छात्रों को बाहरी दुनिया से किसी भी प्रकार का संपर्क करने की अनुमति नहीं होती है।
पेपर लीक होने से रोकने के लिए प्रश्नपत्रों की लॉजिस्टिकल सुरक्षा सुनिश्चित करने में 10,000 से अधिक पुलिस अधिकारी तैनात रहते हैं। प्रश्नपत्रों को पुलिस सुरक्षा के तहत और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पूरे देश में ले जाया जाता है।
इसका संचालन कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ करिकुलम एंड इवैल्यूएशन (KICE) द्वारा किया जाता है। आठ घंटे की इस परीक्षा में छह खंड होते हैं, जिनमें कोरियाई भाषा, गणित, अंग्रेजी, कोरियाई इतिहास, वैकल्पिक विषय और एक दूसरी विदेशी भाषा शामिल हैं। इस परीक्षा के लिए विषयों की संख्या के आधार पर शुल्क 37,000 वॉन से 47,000 वॉन तक होता है।