माथे पर ‘U’ आकार का तिलक लगाने की परंपरा क्यों है प्रचलित? जानिए इसके पीछे निहित धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

सनातन धर्म में तिलक केवल माथे का श्रृंगार नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आपने अक्सर मंदिर के पुजारियों या भक्तों के माथे पर अंग्रेजी के ‘U’ अक्षर जैसा तिलक देखा होगा। इसे ‘ऊर्ध्वपुण्ड्र’ (U-shaped Tilak) कहा जाता है। आइए जानते हैं कि इस विशेष तिलक के पीछे का धार्मिक रहस्य और वैज्ञानिक आधार क्या है।

1. ऊर्ध्वपुण्ड्र तिलक का गहरा अर्थ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘U’ आकार का तिलक मुख्य रूप से भगवान विष्णु और उनके अवतारों के भक्तों द्वारा लगाया जाता है।

यह आकार भगवान विष्णु के चरणों का प्रतीक है। जब कोई भक्त इसे अपने माथे पर धारण करता है, तो इसका अर्थ है कि वह ईश्वर के चरणों की शरण में है। यह विनम्रता और समर्पण का भाव जागृत करता है।

2. तिलक की बनावट और तीन रेखाएं

ऊर्ध्वपुण्ड्र तिलक में अक्सर दो खड़ी रेखाएं होती हैं और नीचे से वे जुड़ी होती हैं। ये दो रेखाएं शरीर की प्रमुख नाड़ियों- ‘इड़ा’ और ‘पिंगला’ का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब हम माथे के बीच (आज्ञा चक्र) पर इसे लगाते हैं, तो यह हमारी एकाग्रता और मानसिक शांति को बढ़ाने में मदद करता है।

3. ‘U’ तिलक लगाने के लाभ

प्राचीन ग्रंथों में तिलक लगाने के कई मानसिक और शारीरिक फायदे बताए गए हैं:

सकारात्मक ऊर्जा: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक धारण करने से मन के विचार शुद्ध होते हैं और व्यक्ति में आत्मविश्वास का संचार होता है।

एकाग्रता (Concentration): माथे के जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है, वहां पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) होती है। इसे रगड़ने या वहां तिलक लगाने से एकाग्रता बढ़ती है।

स्मरण शक्ति: नियमित रूप से तिलक लगाने से याददाश्त तेज होती है और तनाव कम महसूस होता है।

4. चंदन और हल्दी का महत्व

ज्यादातर यह तिलक सफेद चंदन, पीला चंदन या हल्दी से लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंदन की शीतलता मस्तिष्क को शांत रखती है, जिससे व्यक्ति को क्रोध कम आता है और वह शांत रहकर सही निर्णय लेने में सक्षम होता है।

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