पुतिन चलते समय दायां हाथ क्यों रखते हैं स्थिर? बीमारी नहीं, KGB ट्रेनिंग से जुड़ा है ‘गनस्लिंगर गैट’

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी किसी अंतरराष्ट्रीय मंच या सार्वजनिक कार्यक्रम में चलते दिखाई देते हैं, तो लोगों का ध्यान उनकी खास चाल पर जरूर जाता है।

जब पुतिन चलते हैं तो उस समय उनका बायां हाथ तो सामान्य रूप से हिलता है, लेकिन दायां हाथ लगभग स्थिर और शरीर से सटा रहता है। इस अनोखे अंदाज ने लंबे समय से सोशल मीडिया और वैश्विक मीडिया में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।

पुतिन की चाल को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन डॉक्टरों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसके पीछे की असल वजह साफ कर दी है।

बीमारी की अटकलें खारिज

शुरुआत में यह दावा किया जा रहा था कि पुतिन पार्किसंस जैसी गंभीर न्यरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे हैं। हालांकि, मूवमेंट डिसऑर्डर विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

डॉक्टरों का कहना है कि पार्किसंस में केवल एक हाथ का स्थिर रहना ही काफी नहीं होता, बल्कि हाथ कांपना, मांसपेशियों में खिंचाव और संतुलन बिगड़ने जैसे कई अन्य लक्षण भी होते हैं। पुतिन में ऐसे कोई लक्षण नहीं है।

गन्सलिंगर वॉक और KGB ट्रेनिंग का कनेक्शन

न्यूरोलॉजिस्ट्स और सुरक्षा विशेषज्ञों के शोध के अनुसार, पुतिन की इस चाल का संबंध उनकी सोवियत खुफिया एजेंसी KGB की ट्रेनिंग से है। विशेषज्ञों ने इसे गन्सलिंगर चाल का नाम दिया है।

KGB के ट्रेनिंग मैनुअल में अधिकारियों को सिखाया जाता था कि वे अपना दायां हाथ हमेशा शरीर के करीब रखें। इसका मकसद यह था कि किसी भी अचानक हमले की स्थिति में बिना वक्त गंवाए तुरंत बंदूक निकाली जा सके।

1975 में KGB से जुड़े पुतिन ने सालों तक इस कठोर ट्रेनिंग का पालन किया। यही वजह है कि राष्ट्रपति बनने के इतने सालों बाद भी बंदूक तक तुरंत पहुंचने की यह आदत उनकी चलने की शैली का हिस्सा बनी हुई है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *