रात में क्यों रोते हैं कुत्ते और बिल्लियां? जानें शकुन शास्त्र में इसका रहस्य…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

 हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा से कहते आए हैं कि बेजुबान जानवरों का रात में रोना कोई आम बात नहीं है। तो आखिर इसके पीछे का सच क्या है? आइए जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार, इसका क्या मतलब होता है।

भारतीय परंपरा में ‘शकुन शास्त्र’ का बहुत महत्व है। इसके अनुसार, पशु-पक्षियों की कुछ हरकतें हमें भविष्य में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का संकेत देती हैं। माना जाता है कि जानवरों के पास एक ‘छठी इंद्री’ (Sixth Sense) होती है, जिससे उन्हें आने वाले खतरे या नकारात्मक ऊर्जा का आभास हमसे पहले हो जाता है।

बिल्ली का आपके दरवाजे पर रोना

  • शकुन शास्त्र के अनुसार, रात के समय मुख्य दरवाजे पर बिल्ली का रोना आने वाली किसी बड़ी मुसीबत की पूर्व-सूचना हो सकता है।
  • इसे परिवार के किसी सदस्य पर आने वाले संकट या उनके बिगड़ते स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है।
  • ज्योतिष शास्त्र में बिल्ली को राहु ग्रह का प्रतिनिधि माना गया है।
  • बिल्ली के रोने को घर में मानसिक अशांति, बेवजह के तनाव और आपसी झगड़ों (कलह) का संकेत माना जाता है।
  • यह इस बात की ओर भी इशारा करता है कि घर के आस-पास कोई नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) सक्रिय हो सकती है।

रात में गाय का बोलना

कुत्ते और बिल्ली के अलावा, अगर रात में गाय अचानक बोलना (रंभाना) शुरू कर दे, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आमतौर पर गाय दिन के समय ही शांत और प्रसन्न रहती है। शकुन शास्त्र के अनुसार, अगर गाय रात के सन्नाटे में बार-बार बोले, तो इसका अर्थ है कि आस-पास के क्षेत्र में कोई बड़ी समस्या या संकट आने वाला है।

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शास्त्रों का क्या कहना है

शकुन शास्त्र के अनुसार, कुत्तों में पारलौकिक शक्तियों (Negative Energies) या आत्माओं को देखने की क्षमता होती है। रात में उनका रोना किसी अनहोनी का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, अग्नि पुराण और मत्स्य पुराण में भी है इसका जिक्र मिलता है। साथ ही, ज्योतिष शास्त्र के महान ग्रंथ ‘बृहत् संहिता’ (Brihat Samhita) में भी बेजुबान जानवरों के रोने का वर्णन मिलता है। 

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