ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमला क्यों रोका? अमेरिका-इज़राइल ने आखिरी मिनट में बदली रणनीति…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमले टालने के लिए भले ही बातचीत को कारण बताया हो, लेकिन इसके पीछे सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है।

पिछले तीन हफ्तों की भारी बमबारी में ईरान के अहम ऊर्जा ढांचों पर बुरी मार पड़ चुकी है। यदि ट्रंप ईरान के बिजली संयंत्रों पर नए हमले करते तो ईरान के पास खोने के लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं है।

लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई में इजरायल समेत खाड़ी देशों में बड़ा नुकसान होने का खतरा था।

अमेरिका ने क्यों टाला ईरान पर हमला?

बुनियादी ढांचों पर हमले से ईरानी जनता के बीच काफी नाराजगी बढ़ी है और यहां तक कि जो सरकार का विरोध कर रहे थे, वे भी अमेरिका और इजरायल की निंदा कर रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान में लगभग 500 बिजली संयंत्र हैं, जबकि इजरायल में इनकी संख्या मात्र 50 है। 

ईरान का सबसे बड़ा बिजली संयंत्र जरूरत का मात्र चार प्रतिशत ही बिजली पैदा कर पाता है, जबकि इजरायल का सबसे बड़ा केंद्र देश की जरूरत का 20 प्रतिशत बिजली देता है। ऐसे में ईरान का जवाबी हमला भारी नुकसान कर सकता है।

इसके अलावा, पिछले तीन हफ्तों के दौरान ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी आलोचना हो रही है। रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति की प्रमुख मीरजाना स्पोलजारिक कहती हैं कि बुनियादी ढांचों पर बमबारी नागरिकों को निशाना बनाए जाने के ही समान है।

रविवार और सोमवार को राजधानी तेहरान बिजली कटौती के चलते पूरी रात अंधेरे में डूबी रही। ये स्पष्ट नहीं हो सका कि ब्लैकआउट किस वजह से था।

होर्मुज जलमार्ग को खुलवाने के लिए बिजली संयंत्रों पर हमले की ट्रंप की धमकी से अमेरिका और इजरायल के अभियान का समर्थन करनेवाले भी उनके आलोचक बन गए।

ईरान के निर्वासित शाह के बेटे रेजा पहलवी ने अमेरिका और इजरायल से हमले के लिए ईरानी नागरिकों और वहां की सरकार के बीच अंतर करने की अपील की। कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने कहा कि बुनियादी ढांचों को हमले से अलग रखना चाहिए, जिन पर नौ करोड़ लोग निर्भर हैं।

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