बोर्ड ऑफ पीस में भारत क्यों नहीं हुआ शामिल? अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों ने भी बनाई दूरी, अब ट्रंप क्या कदम उठाएंगे?…

गाजा में स्थाई शांति स्थापित करने को लेकर दावोस में गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में किये गये ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की औपचारिक लॉन्चिंग और इसकी स्थापना से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर आयोजित समारोह से भारत ने दूरी बना कर रखी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसमें शामिल होने के लिए भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी को भी आमंत्रित किया था। जानकारों के मुताबिक भारत ने लंबे विमर्श के बाद फिलहाल इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

भारत ने ट्रंप के गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से दूरी बनाई

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह काफी संवेदनशील प्रस्ताव है और अभी वह ट्रंप के प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है।

वैसे भारत के अलावा भी अमेरिका के अन्य कई प्रमुख साझेदार देशों जैसे फ्रांस, ब्रिटेन आदि ने हिस्सा नहीं लिया। चीन को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वह भी शामिल नहीं हुआ।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ का मुख्य उद्देश्य गाजा पट्टी में स्थायी शांति स्थापित करने और अन्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सूत्रों ने बताया कि इस समारोह में भारत सरकार का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।

यहां तक कि उस कमरे में भारत सरकार का कोई अधिकारी उपस्थित भी नहीं था। यह भारत की सतर्कता को दर्शाता है।

पाकिस्तान की उपस्थिति और संवेदनशील प्रस्ताव मुख्य कारण

भारत लंबे समय से फिलिस्तीन मुद्दे पर ‘दो-राज्य समाधान’ का समर्थन करता रहा है, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रहें।

बहरहाल, एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का शामिल होना भी है।

भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को उठाता है।

ऐसे में पाकिस्तानी नेताओं के साथ मंच साझा करना भारत के अभियान को नुकसान पहुंचा सकता था। साथ ही जिस तरह से गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस के समारोह में राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह से भारत व पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का दावा कर दिया, भारत उससे भी सचेत था।

बोर्ड का चार्टर कहता है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता, वैध शासन और स्थायी शांति को बढ़ावा देगा।

इसमें व्यावहारिक निर्णय, सामान्य समझ वाले समाधान और असफल दृष्टिकोण से अलग होने को लेकर कदम उठाने की बात भी कही गई है। बोर्ड का शीर्ष स्तर पूरी तरह से राज्य प्रमुखों से मिलकर बनेगा, जिसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे।

फ्रांस, ब्रिटेन, चीन जैसे प्रमुख सहयोगी भी अनुपस्थित रहे

बोर्ड मूल रूप से गाजा के पुनर्विकास, शासन की निगरानी और फंडिंग समन्वय के लिए बनाया गया है। यह इजरायल-हमास संघर्ष के दो सालों में तबाह हो चुकी पट्टी को नये सिरे से बसाएगा।

ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार करने वाले देशों में अर्जेंटीना, अल्बानिया, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, बुल्गारिया, मिस्त्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, मोरक्को, मंगोलिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।

कंबोडिया, चीन, क्रोएशिया, साइप्रस, ग्रीस, इटली, पैराग्वे, रूस, ¨सगापुर, थाईलैंड और यूक्रेन जैसे देशों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है।

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