भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो गई।
इसकी जानकारी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रूस के बदले अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेग।
उसके बाद से बयानों का दौर शुरू हो गया। रूस ने कहा- भारत किसी से भी तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है तो भारत ने जवाब में कहा कि देश का हित सर्वोपरि हैं।
दरअसल, साल के पहले हफ्ते में वेनेजुएला पर हमला करने के बाद अब यहां अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका का नियंत्रण है। अमेरिकी कंपनियां ऑयल सेक्टर में इन्वेस्ट कर रही हैं।
अब सवाल यह है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे तो क्या वेनेजुएला भारत की जरूरत पूरी कर पाएगा?
इस बीच एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है-
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में वेनेजुएला रूस की जगह नहीं ले सकता है, वेनेजुएला केवल आंशिक तौर पर ही मददगार साबित हो सकता है।
इसकी वजह है कि भारत में सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में ही वेनेजुएला के कच्चे तेल को बड़ी मात्रा में लगातार रिफाइन किया जा सकता है।
देश की बाकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के तेल को रिफाइन करना, अब भी जोखिम भरा है; क्योंकि वेनेजुएला के तेल की गुणवत्ता बेहद खराब है।
यही कारण है कि सरकारी स्वामित्व वाली पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला डिलीवरी के आधार 13 से 15 डॉलर प्रति बैरल तक छूट की पेशकश करती रही है।
भारत कितना कच्चा तेल खरीदता है?
भारत रोजाना 50 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जबकि वेनेजुएला का मौजूदा कुल तेल उत्पादन सिर्फ 8 लाख बैरल प्रतिदिन है।
यह सच है कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन उत्पादन भारत की जरूरत के मुकाबले बहुत कम है।
वेनेजुएला अपना तेल अमेरिका, चीन और क्यूबा को भी बेचता है। ऐसे में बिना उत्पादन बढ़ाए भारत की मांग पूरी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
असल समस्या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। वेनेजुएला के पास अभी इतना मजबूत ढांचा नहीं है कि वह उत्पादन तेजी से बढ़ा सके। इसके लिए बड़े निवेश और कई साल का समय लगेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला को हर दिन 30 से 40 लाख बैरल तेल उत्पादन के स्तर तक पहुंचने में कम से कम पांच साल लगेंगे। दूसरी ओर ट्रंप का कार्यकाल एक साल बीत चुका है और तीन साल अभी बाकी है।
अमेरिकी मीडिया का दावा- वेनेजुएला का तेल रूस जैसा
अमेरिकी मीडिया CNN ने टॉरटॉइज कैपिटल के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर रॉब थम्मेल के हवाले छापा कि वेनेजुएला का कच्चा तेल गुणवत्ता के लिहाज से रूसी तेल जैसा है और भारत की रिफाइनरियां इसे पहले से ही प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
हालांकि, वेनेजुएला का तेल ढांचा काफी जर्जर हो चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 1999 में समाजवादी सरकार के सत्ता में आने से पहले के 30 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक उत्पादन स्तर पर लौटने के लिए कम से कम एक दशक का समय और अरबों डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।