कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में 2026-27 का राज्य बजट पेश करते हुए शराब एक्साइज और नियामक ढांचे में व्यापक सुधारों की घोषणा की।
इन सुधारों में नया अल्कोहल-आधारित ड्यूटी स्ट्रक्चर शुरू करना, कीमत निर्धारण में पूर्ण डीरेगुलेशन और टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी प्रणाली शामिल है।
आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए एक्साइज सेक्टर से 45,000 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य राज्य की दशकों पुरानी एक्साइज व्यवस्था को आधुनिक बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने, अनुपालन सुनिश्चित करने और व्यापार करने में आसानी लाने के उद्देश्य से है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई नीति के तहत एक्साइज ड्यूटी का एक समान बेस लेवल होगा। इसके अतिरिक्त, एक्स-फैक्ट्री प्राइस स्लैब के आधार पर एक तय सीमा में एक्स्ट्रा एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी।
हर लीटर में अल्कोहल की मात्रा के आधार पर एक समान एक्साइज ड्यूटी लगाने की व्यवस्था अगले तीन से चार वर्षों में अलग-अलग चरणों में लागू की जाएगी। बाजार में अस्थिरता से बचने के लिए कीमतों में बदलाव भी धीरे-धीरे किया जाएगा।
मूल्य निर्धारण प्रणाली का रेगुलेशन
सरकार राज्य द्वारा प्रबंधित मौजूदा प्राइस फिक्सेशन सिस्टम को पूरी तरह से डीरेगुलेट करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति के तहत प्रोडक्ट को किस प्राइस स्लैब में रखा जाएगा, इसका फैसला बाजार की रणनीति के अनुसार प्रोड्यूसर स्वयं करेंगे।
एक्साइज स्ट्रक्चर को आसान बनाने के लिए शराब के लिए प्राइसिंग स्लैब की संख्या को कम किया जाएगा। मौजूदा 16 स्लैब को घटाकर 8 स्लैब किया जाएगा, जिससे प्राइसिंग सिस्टम को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाया जा सके।
टेक्नोलॉजी के जरिये निगरानी और पारदर्शिता
लीकेज रोकने और राज्यभर में शराब की आवाजाही की बेहतर निगरानी के लिए सरकार टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम लागू कर रही है।
डिस्पैच के लिए फिजिकल एस्कॉर्ट्स की जगह जियो-फेंस्ड ई-लॉक सिस्टम लाया जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस अपने आप रिन्यू हो जाएंगे।
लेबल अप्रूवल, ओकेजनल लाइसेंस और आरवीबी लाइसेंस ऑनलाइन सेल्फ-डिक्लेरेशन और फीस पेमेंट के आधार पर ऑटो-जेनरेट होंगे। इन मामलों में डीम्ड अप्रूवल लागू होगा और किसी तरह का मैनुअल हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
शराब क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा
शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां को 24×7 ऑपरेशन की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही बीयर लेबल पर माल्ट और शुगर कंटेंट दर्शाने की अनिवार्यता भी हटा दी जाएगी।
एक अहम कदम के तहत, डिस्टिलरी और ब्रूअरीज को टेस्टिंग सेशन आयोजित करने और आने वाले पर्यटकों को अपनी यूनिट में बने प्रोडक्ट बेचने की अनुमति दी जाएगी। इसका उद्देश्य अल्कोहल सेक्टर में पर्यटन को बढ़ावा देना है।
सिद्धारमैया ने एक्साइज विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया। राज्य सरकार द्वारा गठित रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी जल्द ही एक ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें मॉडर्न एक्साइज टैक्सेशन और अल्कोहल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की रूपरेखा होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ड्राफ्ट रिपोर्ट को आगे के कानूनी कदम उठाने से पहले पब्लिक कंसल्टेशन के लिए सार्वजनिक किया जाएगा। जिन सुधारों के लिए कानूनी मंजूरी आवश्यक होगी, उन्हें एक नए और व्यापक एक्साइज बिल के रूप में पेश किया जाएगा।
क्या है लक्ष्य?
राज्य के वित्त में एक्साइज सेक्टर की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में रेवेन्यू में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वित्तीय वर्ष 2025–26 में फरवरी तक एक्साइज रेवेन्यू 36,492 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12.7% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए राज्य ने एक्साइज से 45,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लक्ष्य तय किया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां एक्साइज विभाग टैक्सेशन और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर ध्यान देगा, वहीं हेल्थ डिपार्टमेंट शराब सेवन के सामाजिक प्रभावों को संबोधित करेगा।
इसके तहत पब्लिक हेल्थ इंटरवेंशन, नशा मुक्ति और रिहैबिलिटेशन से जुड़ी पहलें की जाएँगी।
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए अन्य सेक्टरों से भी रेवेन्यू लक्ष्य तय किए हैं। इनमें स्टैम्प और रजिस्ट्रेशन से 29,000 करोड़ रुपये, मोटर व्हीकल्स से 15,500 करोड़ रुपये और खनन रॉयल्टी से 11,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।