सिया ने कहां से दिया था धक्का? लोहागढ़ में इतिहास से ज्यादा ‘सिया पॉइंट’ की चर्चा, बढ़ रहा डार्क टूरिज्म…

 पर्यटन का मतलब आमतौर पर खूबसूरत पहाड़, समुद्र, ऐतिहासिक इमारतें और नई संस्कृति को देखना होता है।

लेकिन अब दुनिया के साथ भारत में भी पर्यटन की एक ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसमें लोग उन जगहों पर पहुंच रहे हैं जो किसी हत्या, हादसे, युद्ध, आपदा या बड़े मानवीय दुख से जुड़ी हैं। इसे डार्क टूरिज्म कहा जाता है।

महाराष्ट्र के पुणे स्थित लोहागढ़ किले का हालिया उदाहरण इस बदलती प्रवृत्ति को समझने के लिए काफी है। किला लंबे समय से मराठा इतिहास और ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद कुछ पर्यटक अब गाइड से उस जगह के बारे में पूछ रहे हैं, जहां कथित तौर पर अपराध हुआ था। स्थानीय स्तर पर उस जगह को सिया स्पाट तक कहा जाने लगा है।

मीडिया रिपोर्टों में घटना के बाद किले में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है। इसी तरह का कौतुहल मेघालय हनीमून कांड से जुड़ी चेरापूंजी स्थित एक घाटी को लेकर भी देखा जा रहा है।

चेरापूंजी गए लोग उस स्थान के बारे में जरूर पूछते हैं, जहां इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की कथित रूप से हत्या कर दी गई थी।

2024 में वायनाड में भूस्खलन के बाद केरल पुलिस को लोगों से अपील करनी पड़ी थी कि वे त्रासदी वाले इलाकों में साइटसीइंग के लिए न जाएं, क्योंकि इससे बचाव और राहत कार्य प्रभावित हो सकते हैं। यानी किसी दुखद घटना के तुरंत बाद उस जगह को देखने की जिज्ञासा भी पर्यटन के इस नए रूप का हिस्सा बनती जा रही है।

जिज्ञासा से याद तक का सफर
द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के अनुसार, किसी ताजा अपराध की जगह पर कौतूहल के कारण पहुंचना डार्क टूरिज्म का सबसे विवादित रूप है, लेकिन इसका पूरा दायरा इससे कहीं बड़ा है। यह सांस्कृतिक अपराध-विज्ञान के क्षेत्र का दिलचस्प विषय है, जो इस बात का अध्ययन करता है कि लोग अपराध को कैसे समझते हैं और हिंसा को किस नज़रिए से देखते हैं।

लोग आखिर ऐसी जगहों पर क्यों जाना चाहते हैं?

इसका कोई एक जवाब नहीं है। कुछ लोग इतिहास को करीब से समझना चाहते हैं, कुछ किसी घटना की सच्चाई और उसके असर को महसूस करना चाहते हैं, जबकि कुछ के लिए यह सिर्फ जिज्ञासा या इंटरनेट मीडिया से पैदा हुआ आकर्षण हो सकता है।

ट्रू क्राइम नाम की नान-फिक्शन शैली की लोकप्रियता भी इस बदलाव को समझने में मदद करती है। अपराध पर आधारित डाक्यूमेंट्री, पाडकास्ट, किताबें और वेब सीरीज लोगों में वास्तविक घटनाओं के प्रति दिलचस्पी बढ़ा रही हैं। ऐसे में किसी चर्चित अपराध की वास्तविक जगह देखने की इच्छा पैदा होना असामान्य नहीं है।

ट्रू क्राइम और डार्क टूरिज़्म दोनों ही समाज के चलन का अनुसरण करते हैं और हमें इस बारे में ज़रूरी जानकारी देते हैं कि हम हिंसा और अपराध को कैसे समझते हैं। ये दिखाते हैं कि आपराधिक और हिंसक घटनाओं के प्रति समाज का नज़रिया जटिल होता है।

इसमें जिज्ञासा के साथ-साथ घटनाओं पर सोचने-समझने, उन्हें याद रखने, उनके कारणों को जानने और उनका मतलब समझने की इच्छा भी शामिल होती है।

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