Diwali कब है: 20 अक्टूबर या 21 अक्टूबर? जानें ज्योतिषियों की राय और लक्ष्मी पूजन का सही समय…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

2025 में दिवाली कब है? अगर आपको भी दिवाली की तारीख को लेकर कंफ्यूजन है,तो आपको ज्योतिषियों की राय जाननी चाहिए।

कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का पर्व होता है। इसलिए इस पर्व में अमावस्या तिथि और प्रदोष काल दोनों को होना बहुत जरूरी है।

आपको बता दें कि दिवाली पांच दिन का पर्व है, लेकिन दो अमावस्या तिथि होने के कारण इस साल दिवाली छह दिन का पर्व होगा।

यहां जानें विद्वानों ने दिवाली की क्या तारीख बताई और धनतेस से लेकर नरक चतुर्दशी और गोवर्धन पूजा, भाई दूज कब कब बनेंगे।

20 अक्टूबर या 21 अक्टूबर दिवाली किस दिन
काशी विद्वत परिषद वाराणसी में विद्वानों और आध्यात्मिक विशेषज्ञों का एक मंच है। इस परिषद का कहना है कि दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

सभी विद्वानों का कहना है कि अमावस्या तिथि और पूर्ण प्रदोष काल गोधूलि बेला, जो लक्ष्मी पूजा के लिए अनिवार्य है, वो 20 अक्टूबर को पड़ रहा है।

इसलिए दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। दरअसल दो दिन अमावस्या होने के कारण कंफ्यूजन की स्थिति बनी थी। ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी का कहना है कि दीपावली कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावश्या को मनायी जाती है जो इस वर्ष श्री शुभ संवत् 2082 शाके 1947 कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर 2025 दिन सोमवार को मनायी जायेगी।

अमावश्या तिथि 20 अक्टूबर दिन सोमवार को दिन में 2:32 से आरंभ होकर अगले दिन अर्थात 21 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार को दिन में 4:25 बजे तक व्याप्त रहेगा।

इस प्रकार अमावश्या की सम्पूर्ण रात 20 अक्टूबर को ही मिल रहा है। 20 अक्टूबर दिन सोमवार को ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग मिल रहा है ।

आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी सोमवार को 20 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण दीपावली मनाई जाएगी। उदया तिथि में अमावस्या मंगलवार 21 तारीख की है किंतु मंगलवार को व्यापारियों के लिए पूजन करना धन विनाशक रहेगा।

लक्ष्मी पूजन – शाम पांच बजकर 51 मिनट से आठ बजकर तीस मिनट तक
दूसरा लग्न- रात्रि सात बजकर 18 से नौ बजकर 15 तक
सिंह लग्न- मध्य रात्रि उपरांत एक बजकर 48 मिनट से चार बजे तक
चौघड़िया समय- पांच बजकर 51 मिनट से रात्रि सात बजकर 26 मिनट तक
लाभ का चौघड़िया -रात्रि दस बजकर 37 मिनट से बारह बजकर बारह मिनट तक

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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