जब 12 घंटे में हुई 900 मौतें… अमेरिका के AI सिस्टम ने युद्ध की रणनीति कैसे बदल दी? Inside Story…

 कभी यह कल्पना की जाती थी कि कंप्यूटर और सैनिक एक साथ मिल कर कुछ ही घंटों में युद्ध का परिदृश्य बदल देंगे।

आज यह न सिर्फ हकीकत बन चुका है बल्कि ईरान इसका दर्द भी झेल रहा है। इसे संभव बनाया है एआइ ने।

अमेरिका ने 28 फरवरी को 12 घंटे में ईरान पर 900 हमले किए। अमेरिका के मेवन स्मार्ट सिस्टम ने रियल टाइम में लाखों आब्जेक्ट का विश्लेषण करते हुए लक्ष्य चुने और मिसाइलों की बौछार ने 1,000 से अधिक लोगों को मौत की नींद सुला दिया।

मेवन स्मार्ट सिस्टम 

मेवन स्मार्ट सिस्टम युद्धक्षेत्र का रियल टाइम विश्लेषण करने वाला दैत्य है जिसने अमेरिकी हमलों को ऐसी रफ्तार दी, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।

मीडिया रिपो‌र्ट्स के अनुसार पालेनटीर एमएल/एआई ने हजारों सेटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज और दुश्मन के इंटरसेप्ट किए गए कम्युनिकेशन और 150 से अधिक दूसरी फीड्स को खंगालकर पहले दिन अमेरिकी सेना के लिए 1,000 से अधिक हमले के विकल्प बताए। सिर्फ मेवेन ही नहीं इस्तेमाल हो रहे एआइ टेक सैनिकों को तेजी से स्मार्ट फैसले लेने में मदद कर रहे हैं।

मेवन सिस्टम ने इरान में क्या किया है?

पहले डाटा के विशाल भंडार में से एक घंटे में 1,000 आब्जेक्ट की पहचान दोस्त या दुश्मन के तौर पर करनी होती थी। अब यही काम एआइ रियल टाइम में कर रहा है।

छह दिन में 2,000 टारगेट पर हमला अमेरिका ने पिछले छह दिन में ईरान में 2,000 टारगेट को निशाना बनाया है और इसमें 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर का कहना है कि इसने हमलों की संख्या और तीव्रता को दोगुना कर दिया है।

क्या है मेवेन स्मार्ट सिस्टम?

पालंटिर टेक्नोलाजीज द्वारा तैयार किया गया मेवन स्मार्ट सिस्टम बेहद शक्तिशाली एआइ एल्गोरिदम है जिसने आधुनिक युद्ध के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है।

इसका मुख्य काम कंप्यूटर विजन का उपयोग करके युद्ध के मैदान की लाखों तस्वीरों और वीडियो फुटेज को स्कैन करना है। डाटा प्रोसे¨सग: ड्रोन और सेटेलाइट से मिलने वाले अंतहीन वीडियो फुटेज को इंसान के लिए देख पाना और उसमें से खतरे को पहचानना नामुमकिन है। मेवन इसे सेकंडों में कर लेता है।

लक्ष्य की पहचान

यह सिस्टम भीड़ में से दुश्मन की गाडि़यों, हथियारों के डिपो, और छिपे हुए ठिकानों को पहचान सकता है।सटीकता: यह शोर और सिग्नल के बीच अंतर कर सकता है, जिससे नागरिकों की मौत की संख्या कम करने और सटीक हमले करने में मदद मिलती है।

कैसे तैयार हुआ मेवन सिस्टम?

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, मेवन सिस्टम के विकास की शुरुआत 2017 में हुई थी। अमेरिकी रक्षा विभाग ने महसूस किया कि उनके पास ड्रोन फुटेज का इतना विशाल भंडार है कि उसे देखने के लिए पर्याप्त इंसान ही नहीं हैं। शुरुआत में, अमेरिकी सेना ने गूगल के साथ साझेदारी की।

गूगल के पास दुनिया का सबसे उन्नत इमेज रिकग्निशन साफ्टवेयर था। सेना चाहती थी कि गूगल का टेंसरफ्लो उनके ड्रोन फुटेज में मौजूद कारों, इंसानों और इमारतों की पहचान करना सीखे।

जब गूगल के कर्मचारियों को पता चला कि उनका कोड युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है, तो 3,000 से अधिक कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 2018 में गूगल ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए। बाद में पेंटागन ने एंड्रुइल इंडस्ट्रीज और पैलेंटीर जैसी छोटी टेक कंपनियों पर दांव लगाया।

इन कंपनियों ने लाखों घंटों के पुराने युद्ध फुटेज को एआइ को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया। एआइ ने सीखा कि एक साधारण ट्रक और राकेट ले जाने वाले ट्रक में क्या अंतर होता है।

मेवन का सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब इसे ड्रोन के भीतर ही फिट कर दिया गया। इसका मतलब है कि ड्रोन अब डाटा को बेस पर भेजने का इंतजार नहीं करता, बल्कि उड़ते समय खुद ही संदिग्ध गतिविधियों को भांपता है और आपरेटर को अलर्ट भेजता है।

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