गोरखपुर के डॉ. सर्वेष्ट का WhatsApp मॉडल बना मिसाल, रोजाना यूपी के 20 लाख बच्चों तक पहुंच रहा रीडिंग मटेरियल…

कोरोना काल में जब स्कूलों के दरवाजे बंद थे, डा. सर्वेष्ट मिश्र शिक्षा में नवाचार की बुनियाद रख रहे थे। परिचित शिक्षकों को जोड़कर उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जिसकी संख्या देखते-देखते एक हजार पहुंच गई। उद्देश्य केवल शिक्षकों का डिजिटल समूह बनाना नहीं, उनके नवाचार, अनुभव और उपयोगी शैक्षणिक सामग्री को एक-दूसरे तक पहुंचाना था।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शिक्षक जुड़े तो इस प्रयास को विस्तार मिला। उसी पहल का नाम एडूलीडर्स है, जिसकी पठन-पाठन सामग्री आज हर सुबह 75 हजार शिक्षकों के माध्यम से 20 लाख बच्चों तक पहुंच रही है।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डा. सर्वेष्ट एडूलीडर्स की व्याख्या शैक्षिक मागदर्शक के तौर पर करते हैं। शैक्षणिक सामग्री में होता क्या है? इस बारे में सर्वेष्ट उत्साहित होकर बताते हैं। आज का सुविचार, ज्ञान गंगा, हिंदी-इंग्लिश-संस्कृत शब्द, सामान्य अध्ययन, बूझ भाई बूझ, सुभाषितानि, योग प्रवाह, बाल सवाल और शब्द संग्रह जैसी सामग्री छात्रों में नैतिक मूल्यों के साथ समग्र विकास में सहायक है।

मार्निंग सर्किल टाइम, स्वतंत्र खेल, भाषा एवं साक्षरता कौशल, कला, गणित और खेल से जुड़ी गतिविधियों के संबंधित सुझाव शिक्षकों के लिए जरूरी है। रोजाना इसकी व्यवस्था करना हर शिक्षक के लिए चुनौती भरा काम होता था, जिसे एडूलीडर्स ने आसान बना दिया। पठन-पाठन से जुड़ी यह सामग्री अलग-अलग किताबों, इंटरनेट, मैग्जीन और अन्य जगहों से ली जाती है और उनका स्रोत भी दिया जाता है। पूरी सामग्री मुख्य एडमिन के ग्रुप में पोस्ट हो जाती है।

इसके बाद जिलों के ग्रुप एडमिन इसे अपने जिले के ग्रुप में भेजते हैं। यह सामग्री एडूलीडर्स के फेसबुक पेज, कुटुंब एप और एक्स जैसे इंटरनेटमीडिया प्लेटफार्म पर भी रहती है। डा. सर्वेष्ट के दावे पर शिक्षक भी मुहर लगाते हैं। झांसी के बड़ा गांव ब्लाक स्थित कोट प्राथमिक विद्यालय की शिक्षका डा. सुमन, सुभाषितानि को बच्चों में नैतिक मूल्य विकसित करने का उपयोगी माध्यम बताती हैं।

बिजनौर के नजीबाबाद स्थित अकबरपुर आंवला, उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक सुधीर राणा कहते हैं कि जिस शैक्षणिक सामग्री के लिए हमें परेशान होना पड़ता था, अब एक ही जगह मिल जाती है। लखनऊ, गोसाईगंज ब्लाक के बखारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक संतोष कुमार संस्कारशाला से प्रभावित हैं। कहते हैं, नये शब्द, हिंदुस्तान की झांकी जैसे तथ्य बच्चों के सामान्य ज्ञान को विकसित करने में सहायक हैं।

कुशीनगर, पडरौना के गायघाट प्रधान टोला उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक सत्यजीत द्विवेदी गुड टच-बैड टच, आत्मरक्षा से जुड़े तथ्यों को बेहद उपयोगी बताते हैं। शिक्षा में नवाचार के लिए शिक्षकों को प्रतिवर्ष एडूलीडर्स अवार्ड भी दिए जाते हैं। 

राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी मिली है सराहना

आदर्श प्राथमिक विद्यालय मूड़घाट में प्रधानाध्यापक डा. सर्वेष्ट मिश्र को वर्ष 2018 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके कार्यों की सराहना कर चुके हैं।

वर्तमान में डा. सर्वेष्ट उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बेसिक शिक्षा स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य हैं। वह राज्य माड्यूल लेखन और राज्य आकलन समूह से भी जुड़े हैं। प्री-प्राइमरी शिक्षा संचालन समिति के सदस्य होने के साथ ही बस्ती में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला समन्वयक भी हैं।

क्या कहता है नंबर गेम? 

  • 75 जिलों में बना एडूलीडर्स ग्रुप, सबके अलग एडमिन 
  • 1000 शिक्षक हैं हर जिले के ग्रुप में
  • 30 हजार लोग जुड़े हैं कुटुंब एप में
  • 6 हजार से अधिक है इंटरनेट मीडिया पर फालोवर
  • 5 बजे सुबह तक पहुंच जाती है पठन-पाठन सामग्री 

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