प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
घर के मंदिर में हम रोज सुबह-शाम धूप, अगरबत्ती या हवन सामग्री जलाते हैं।
इनसे निकलने वाला धुआं तो घर की नकारात्मकता (Negativity) दूर करता है, लेकिन पूजा खत्म होने के बाद जो राख बचती है, उसका क्या किया जाए? अक्सर लोग इसे साधारण कचरा समझकर सिंक या कूड़ेदान में डाल देते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस राख में भी पूजा की सकारात्मक ऊर्जा और देवताओं का अंश होता है?
राख का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, हवन या धूप की राख को ‘भस्म’ माना जाता है। इसे अनुचित स्थान पर फेंकना सीधे तौर पर देवी-देवताओं का अपमान माना गया है।
पूजा की राख को कभी भी पैरों के नीचे नहीं आने देना चाहिए, क्योंकि इससे घर की सुख-समृद्धि में कमी आ सकती है और वास्तु दोष भी पैदा हो सकता है।
कहां विसर्जित करें पूजा की राख?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पूजा की राख को विसर्जित करने के कुछ खास नियम हैं। अगर आपके घर के पास कोई पवित्र नदी या जलाशय है, तो इसे जल में प्रवाहित करना सबसे उत्तम है।
लेकिन, अगर ऐसा संभव न हो, तो धार्मिक गुरुओं की सलाह है कि आप इस राख को किसी गमले या साफ मिट्टी वाली जगह पर डाल दें। खासकर तुलसी के पौधे या पीपल के पेड़ की जड़ में इसे डालना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि वहां इसकी पवित्रता बनी रहती है।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
पुराणों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धूप की राख को कभी भी नाली या गंदी जगह पर नहीं बहाना चाहिए। ऐसा करने से राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है।
अगर आप राख को किसी पेड़ के नीचे डाल रहे हैं, तो ध्यान रखें कि वह काँटेदार पौधा न हो। हमेशा फल देने वाले या पवित्र पेड़ों का ही चुनाव करें।
राख के सदुपयोग के कुछ खास तरीके:
हवन की शुद्ध राख को माथे पर तिलक के रूप में लगाने से मन शांत रहता है।
इसे पौधों में डालने से न केवल श्रद्धा बनी रहती है, बल्कि यह प्राकृतिक खाद का काम भी करती है।
अगर आप तुरंत विसर्जित नहीं कर सकते, तो इसे एक मिट्टी के पात्र या डिब्बे में इकट्ठा करके रखें।