तेहरान के लोग लंबे समय से दुनिया की सबसे प्रदूषित हवा में से एक का सामना कर रहे हैं।
इसका मुख्य कारण यह है कि ईरान के बिजली संयंत्र माजुत नामक एक ऐसे ईंधन का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें सल्फर की मात्रा बहुत अधिक होती है। शहर में अम्लीय वर्षा होने की खबरें आई हैं। इसके पीछे माजुत को जलाना कारण हो सकता है।
माजुत मूलत: तेल से सभी मूल्यवान तत्वों को निकालने के बाद बचा हुआ अवशेष है। दुनिया के अधिकांश देशों में इसे जलाना प्रतिबंधित है। केवल कुछ देश, जैसे उत्तर कोरिया इस पर अत्यधिक निर्भर हैं।
यह विडंबना ही है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार वाले ईरान को माजुत की ओर रुख करने की आवश्यकता पड़ी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा है कि सैन्य हमलों से हवा में विषैले तत्व फैल रहे हैं। लंदन स्थित गैर-लाभकारी संस्था कान्फि्लक्ट एंड एनवायरनमेंट आब्जर्वेटरी के अनुसार, इस तरह की आग से विषाक्त गैसों का मिश्रण उत्पन्न होने की आशंका है।
तेल और प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार
ईरान की माजुत पर बढ़ती निर्भरता देश के आर्थिक अलगाव और व्यापार प्रतिबंधों के साथ-साथ दशकों के कुप्रबंधन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के जीर्ण-शीर्ण होने के कारण है। यद्यपि देश में तेल और प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार हैं, फिर भी उसे घरेलू स्तर पर ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान अपने उच्च मूल्य वाले जीवाश्म ईंधन का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए बेचता है। इससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए माजुत का सहारा लेना पड़ता है।
माजुत अत्यधिक प्रदूषणकारी
माजुत अत्यधिक प्रदूषणकारी है। यह तेल से सभी तत्वों को निकालने के बाद बचा हुआ अवशेष है। जलाने पर सल्फर छोड़ता है, जो आक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया कर सल्फर डाइआक्साइड गैस बनाता है।
इस हवा में सांस लेने से गंभीर श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यह गैस हवा में मौजूद अन्य यौगिकों के साथ प्रतिक्रिया करके इतने छोटे कण बनाती है कि फेफड़ों के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकती है।
वायुमंडल में सल्फर डाइआक्साइड वाष्प और आक्सीजन के साथ मिलकर अम्लीय वर्षा के रूप में जमीन पर वापस आ जाती है, जिससे जल प्रदूषित होता है और वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है।