अमेरिका के खिलाफ ईरान की ‘गेम थ्योरी’ क्या है? होर्मुज जलडमरूमध्य के आगे क्या बेअसर पड़ रही है US की सैन्य ताकत?…

ईरान बनाम अमेरिका-इजरायल संघर्ष ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक वैश्विक राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता से नहीं, बल्कि ‘लीवरेज’ यानी प्रभाव क्षमता से तय होती है।

सैन्य रूप से कमजोर होने के बावजूद ईरान ने अपने भूगोल विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट को सबसे प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।

होर्मुज मार्ग के अवरुद्ध होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका प्रभाव ईंधन, खाद्य पदार्थों और परिवहन लागत तक महसूस किया जा रहा है।

यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 फीसद तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के परिवहन का प्रमुख रास्ता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

इस घटनाक्रम ने अमेरिकी नेतृत्व को भी अपने रुख पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर टिकी हैं, जहां की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति दोनों को प्रभावित कर रही है।

ईरान की ‘गेम थ्योरी’

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की वर्तमान स्थिति को ‘गेम थ्योरी’ के एक सिद्धांत- रुबिनस्टीन बार्गेनिंग मॉडल से समझा जा सकता है। इसके तहत किसी भी संघर्ष में पक्षों की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि बिना समझौते के उनकी स्थिति कितनी बिगड़ेगी और समाधान के लिए वे कितने अधीर हैं।

युद्ध जारी रहने पर ईरान को आर्थिक और सैन्य नुकसान झेलना पड़ सकता है, लेकिन केंद्रीकृत शासन व्यवस्था उसे अधिक समय तक टिके रहने की क्षमता देती है।

दूसरी ओर, अमेरिका के लिए लंबा संघर्ष आर्थिक रूप से महंगा है और घरेलू राजनीतिक दबाव- जैसे चुनाव, उसकी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज ने इस संघर्ष में अमेरिका की स्थिति को अपेक्षाकृत कमजोर किया है, क्योंकि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए अपरिहार्य है।

गेम थ्योरी यह भी संकेत देती है कि भविष्य में देशों को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए ऐसे ‘लीवरेज’ विकसित करने होंगे, जिन पर अन्य देशों की निर्भरता हो। यह केवल समुद्री मार्ग ही नहीं, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक प्रभुत्व भी हो सकता है।

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