पश्चिम एशिया संकट: “रूस में एलपीजी उपलब्ध हुई तो वहीं से खरीदेंगे”, भारत ने जताई गहरी चिंता…

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, भारत ने गुरुवार को कहा कि वह लोगों की ईंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने आपूर्ति स्त्रोतों को बढ़ा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत हर जगह से एलपीजी खरीदने की कोशिश कर रहा है और अगर रूस से एलपीजी उपलब्ध होती है, तो वहां से भी एलपीजी की खरीदी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत के पास अधिक विकल्प होना चाहिए और वह रूस सहित विभिन्न स्त्रोतों से तेल खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम हर जगह से एलपीजी खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जहां भी यह उपलब्ध हो।

इसलिए अगर रूस में एलपीजी उपलब्ध है, तो हम वहां से भी खरीदेंगे। क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे हैं कि हमें अपने लोगों की ईंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करना ही होगा।

भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुंओं तथा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को अत्यंत चिंताजनक बताया है। सरकार ने कहा है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और हमले तुरंत रोके जाने चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते लौट रहे
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान में फंसे करीब 882 भारतीय नागरिक अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते अपने घर वापस आ रहे हैं। इसमें , जिनमें छात्र, व्यवसायी और तीर्थयात्री शामिल हैं। कई लोग पहले ही पहुंच चुके हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कई लोगों ने खुद को दूतावास में रजिस्टर नहीं कराया है। इसलिए, हमारा अंदाजा था कि 9,000 लोग थे। इनमें से लड़ाई शुरू होने से पहले काफी संख्या में छात्र लौट आए थे।

उन्होंने आगे कहा कि वहां यात्रा करने वाले 284 तीर्थयात्रियों में से 280 लौट आए हैं; वे आर्मेनिया के रास्ते आए थे। तीन या चार और बचे हैं, जिनके भी एक या दो दिन में पहुंचने की उम्मीद है।

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