‘हम अपने लिए बनाते हैं सामान’- अमेरिका के ओवरप्रोडक्शन आरोपों पर भारत का करारा जवाब…

मैन्यूफैक्चरिंग के तौर-तरीकों व जरूरत से अधिक उत्पादन को लेकर अमेरिकी जांच पर विदेश व्यापार महानिदेशालय का कहना है कि भारत में टेक्सटाइल व स्टील दोनों की उत्पादन क्षमता प्रति व्यक्ति कुल खपत से अधिक नहीं है जो दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है।

अमेरिका अपने व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत इन दिनों 50 से अधिक देशों में होने वाले औद्योगिक उत्पादन के तरीके व अतिरिक्त उत्पादन की जांच कर रहा है।

अमेरिका का मानना है कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार में बढ़त के लिए कई सेक्टर में जरूरत से अधिक उत्पादन करता है।

टेक्सटाइल सेक्टर में उत्पादन जरूरत से अधिक

कई अन्य देशों में अमेरिका वहां उत्पादन के लिए श्रमिकों से जबरन काम कराने की जांच कर रहा है। ट्रेड रिमेडिज के महानिदेशक एवं वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमिताभ कुमार ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के फ्रेमवर्क के किसी भी ट्रेड रिमेडिज कानून में अतिरिक्त उत्पादन की जांच शामिल नहीं है। यह नए प्रकार की धारणा है।

उन्होंने कहा कि हम नहीं समझते हैं कि टेक्सटाइल सेक्टर में हमारा उत्पादन जरूरत से अधिक है। मैनमेड फाइबर व टेक्निकल टेक्सटाइल में हमारा उत्पादन कम है। हमारे देश में गर्म जलवायु है और हम काटन का कपड़ा पहनते हैं। ऐसे में हमारे पास जरूरत से अधिक उत्पादन कैसे हो सकता है।

फाइबर का भी आयात करता है भारत

भारत कॉटन के अलावा मैनमेड फाइबर का भी आयात करता है। स्टील में भी हमारी प्रति व्यक्ति खपत काफी कम है। हम स्टील के उत्पादन में दूसरे नंबर हर हो सकते हैं, लेकिन हमारी प्रति व्यक्ति खपत और हमारी आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए हमारी खपत काफी कम है। भारत ने अमेरिका को कहा है कि कई सेक्टर में भारत में जरूरत से अधिक उत्पादन का आरोप गलत है।

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