अपशिष्ट जल अब बना बहुमूल्य संसाधन, उद्योगों में बढ़ा शोधित पानी का इस्तेमाल…

अपशिष्ट जल को अब केवल निपटान की समस्या के बजाय एक संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। शोधित करके इसका औद्योगिक कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने खुद एक बयान में यह बात साझा की है।

उसने कहा कि शोधित अपशिष्ट जल के दोबारा प्रयोग के राष्ट्रीय ढांच के तहत इसका औद्योगिक और गैर-पेय कार्यों में तेजी से उपयोग किया जा रहा है। सीवेज को केवल एक निपटान समस्या के बजाय संसाधन के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

पोस्ट में कहा, “एनएमसीजी ने इस सोच को बदला है। शोधित जल के सुरक्षित दोबारा उपयोग के राष्ट्रीय ढांच के तहत शोधित सीवेज अब एक संसाधन है। यह उन जगहों पर मीठे पानी की जगह ले रहा है, जहां इसकी बर्बादी कभी नहीं होनी चाहिए।”

इन सभी कार्यों के लिए बताया उपयुक्त

पोस्ट में कहा गया, “किसी पावर प्लांट को टर्बाइन ठंडा करने के लिए पेयजल की जरूरत नहीं होती। किसी निर्माण स्थल को कंक्रीट मिलाने के लिए इसकी जरूरत नहीं होती। किसी खेत को सिंचाई के लिए इसकी जरूरत नहीं होती। इन सभी कार्यों के लिए शोधित अपशिष्ट जल पूरी तरह उपयुक्त है।”

इन जगहों पर किया जा रहा उपयोग

जल शक्ति मंत्रालय के तहत मिशन के अनुसार, ट्रांस यमुना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से प्रतिदिन 80 लाख लीटर शोधित जल औद्योगिक उपयोग के लिए मथुरा रिफाइनरी को भेजा जा रहा है। मिशन ने दिल्ली में प्रगति पावर कारपोरेशन और झारखंड में जोजोबेरा थर्मल पावर प्लांट द्वारा शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग का भी उल्लेख किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *