ईरान के साथ दो हफ्ते का युद्धविराम समाप्त होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया।
भले ही ऐसा कदम उठाने का श्रेय वो मध्यस्थ पाकिस्तान को देते दिख रहे हों, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह उनकी मजबूरी भी हो सकती है क्योंकि 1973 के युद्ध शक्ति अधिनियम के तहत संसद की मंजूरी के बिना अमेरिकी राष्ट्रपति सिर्फ 60 दिनों के लिए ही सेना भेज सकते हैं।
यह अवधि आगामी एक मई को समाप्त हो रही है। इसी सीमा अवधि और शर्त से बचने के लिए पिछले 55 दिन से चल रहे ईरान युद्ध को राष्ट्रपति ट्रंप सैन्य अभियान करार देते आ रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान में दूसरे दौर की शांति वार्ता 36 से 72 घंटे में फिर शुरू हो सकती है।
उधर, ईरान ने वार्ता की अमेरिकी शर्तों को खारिज करते हुए होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों को जब्त कर लिया। इनमें से एक जहाज गुजरात के बंदरगाह पर आ रहा था। यह युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने पहली बार जहाजों को जब्त किया है। जब्ती से पहले जहाजों पर उसने फायरिंग भी की थी।
इससे पहले शनिवार को अमेरिका ने भी ईरान के एक मालवाहक जहाज पर गोलीबारी करके उसे जब्त किया था और मंगलवार को हिंद महासागर में एक विशाल ईरानी तेल टैंकर पर कब्जा कर लिया था।
पीटीआई के अनुसार, ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ”इस तथ्य के आधार पर कि ईरान की सरकार बुरी तरह खंडित है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमसे आग्रह किया है कि हम ईरान पर तब तक हमला न करें जब तक उनके नेता व प्रतिनिधि एक एकीकृत प्रस्ताव न दे दें और वार्ता पूरी न हो जाए।”
हालांकि, ट्रंप ने साफ कर दिया कि ईरान के बंदरगाहों की आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा से पहले ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि अगर बुधवार तक कोई डील नहीं हुई, तो उन्हें उम्मीद है कि बमबारी होगी क्योंकि आगे बढ़ने के लिए यही बेहतर रवैया है। सेना इसके लिए तैयार है।
रॉयटर्स ने ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के हवाले से बताया कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की कोई मांग नहीं की थी और उसने अपनी धमकियों को दोहराया।
अमेरिका की आलोचना करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी युद्ध की कार्रवाई है, लिहाजा युद्धविराम का उल्लंघन है।
उन्होंने एक पोस्ट में कहा, ”एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला करना एवं उसके चालक दल को बंधक बनाना और भी बड़ा उल्लंघन है। ईरान जानता है कि पाबंदियों को कैसे बेअसर करना है, अपने हितों की रक्षा कैसे करनी है और धमकी का विरोध कैसे करना है।”
मंगलवार को अमेरिकी सेना ने श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच हिंद महासागर में एक ईरानी तेल टैंकर पर कब्जा कर लिया था। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी, वह होर्मुज को बंद रखने के अपने फैसले को वापस नहीं लेगा। विरोध प्रदर्शन के तौर पर मंगलवार शाम तेहरान में आयोजित एक परेड में ईरान ने अपने कुछ बैलिस्टिक हथियारों का प्रदर्शन किया।
सरकारी टीवी पर दिखाए गए दृश्यों में भारी भीड़ को ईरानी झंडे लहराते हुए देखा गया और पृष्ठभूमि में एक बैनर लगा था जिसमें एक मुट्ठी होर्मुज को कसकर बंद करे हुई दिखाई गई थी। बैनर पर कैप्शन लिखा था, ”अनिश्चित काल के लिए ईरान के नियंत्रण में” और ”ट्रंप कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते।”
इसके अलावा रॉयटर्स ने ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम के हवाले से बताया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने समुद्री नियमों के उल्लंघन के आरोप में दो जहाजों को जब्त कर लिया और उन्हें ईरानी तटों तक ले गए।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट में व्यवस्था और सुरक्षा में किसी भी तरह की बाधा को ”रेड लाइन” (अत्यंत गंभीर उल्लंघन) माना जाएगा। इससे पहले, एक ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने बताया था कि ईरान की ओर से तीन जहाजों पर गोलीबारी की गई थी।
पीटीआई के अनुसार, ट्रंप की युद्धविराम की ताजा घोषणा के बाद दूसरे दौर की वार्ता फिलहाल टल गई। स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मंगलवार सुबह मियामी से इस्लामाबाद जाने वाले थे, लेकिन उन्हें व्हाइट हाउस की बैठकों में शामिल होने के लिए कहा गया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी पाकिस्तान जाना था, लेकिन वह भी बैठकों में शामिल हुए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक पोस्ट में ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष लड़ाई खत्म करने के लिए एक व्यापक शांति समझौता कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लड़ाई को बातचीत से सुलझाने के लिए पूरी कोशिशें करता रहेगा।
शहबाज के कार्यालय ने कहा कि ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने प्रधानमंत्री से क्षेत्र वर्तमान हालात और शांति के प्रयासों पर बात करने के लिए मुलाकात की। हालांकि, एएनआइ के अनुसार, ईरानी पक्ष को पाकिस्तानी मध्यस्थता में वार्ता पर अब भरोसा नहीं हो रहा है क्योंकि वे अमेरिका से कोई ठोस जवाब दिलाने में नाकाम रहा है।
बेसेंट ने लगाए प्रतिबंध
पीटीआई के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस बीच ईरान, तुर्किये और यूएई में मौजूद 14 लोगों, कंपनियों और विमानों पर ईरानी सरकार की तरफ से हथियार या हथियारों के कलपुर्जे खरीदने या ट्रांसपोर्ट करने में कथित तौर पर शामिल होने के लिए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान का खार्ग द्वीप और भंडारण स्थल कुछ ही दिनों में पूरी तरह भर सकते हैं, जिससे शायद तेल के कुओं को बंद करना पड़ सकता है।
लेबनान में युद्धविराम उल्लंघन
रायटर्स के अनुसार, लेबनान के अधिकारियों ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के दो उल्लंघनों की सूचना दी है।
लेबनान में युद्धविराम ईरान के बातचीत के लिए सहमत होने की एक पूर्व शर्त थी। लेबनान की पश्चिमी बेका घाटी में इजरायली ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए, जबकि इसके बाद दक्षिणी लेबनान में एक कार पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई।
इजरायली सेना ने कहा कि उसे पहले हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दूसरे हमले के बारे में उसने कोई जवाब नहीं दिया। हिजबुल्लाह ने कहा कि उसने इजरायल की ओर से युद्धविराम उल्लंघन के जवाब में मंगलवार को उत्तरी इजराइल पर राकेट और ड्रोन दागे।