फ्रांस और बेल्जियम समेत यूरोप के कई देशों में उग्र प्रदर्शन, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें…

यूरोप के कई देशों में महंगाई, आवास संकट और राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस, बेल्जियम, इटली, पुर्तगाल और अल्बालिया के कई शहरों में शनिवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।

फ्रांस में बढ़ती कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के विरोध में, पिछले कुछ वर्षों के सबसे हिंसक प्रदर्शनों में से एक के दौरान, हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि देश में हिंसा का कोई स्थान नहीं है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 272 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पेरिस, मार्सिले, रेनेस, टूलूज और एंगर्स जैसे शहरों में नकाबपोश लोगों द्वारा हिंसा की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में लूटपाट की कोशिश, पुलिस से टकराव, सड़क पर मौजूद चीजों में आग लगाना और सत्ता के केंद्रों तथा मीडिया संस्थानों को निशाना बनाना शामिल है।

मंत्रालय ने इसके लिए “अल्ट्रा-लेफ्ट” समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। ल्योन शहर में प्रदर्शनकारियों ने एक पर्यटक कार्यालय में आग लगा दी। ये विरोध प्रदर्शन पिछले महीने पेरिस के हाई स्कूलों से शुरू हुए थे।

वहां शिक्षकों की कमी और खराब सुविधाओं को लेकर पनपा गुस्सा बाद में एक बड़े आंदोलन में बदल गया, जो असमानता, सरकारी खर्च और जीवन स्तर जैसे मुद्दों पर केंद्रित था।

शनिवार को पेरिस में भारी पुलिस बल तैनात था, खासकर चैंप्स-एलिसीज और आर्क डी ट्रायंफ जैसी मशहूर जगहों के पास। प्रदर्शनकारियों ने चमकीली जैकेटें पहन रखी थीं और सड़कों को जाम कर दिया था। यह नजारा येलो वेस्ट आंदोलन की याद दिलाता है, जो राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पिछले कार्यकाल के दौरान हुआ था।

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकार्नू ने कहा कि देश हिंसा से डरने वाला नहीं है। बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इन घटनाओं पर लेकार्नू ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि हिंसा के जरिए किसी को राजनीतिक एजेंडा थोपने नहीं दिया जाएगा।

बेल्जियम में भी पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने

फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों का असर अब बेल्जियम तक पहुंच गया है। लीज शहर में शनिवार को सैकड़ों छात्रों ने बढ़ती शिक्षा लागत, कक्षाओं में भीड़ और अध्ययन सामग्री की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस से झड़प हुई और गिरफ्तारियां भी हुईं।

ब्रसेल्स में भी शनिवार को सैकड़ों लोगों (ज्यादातर युवा) ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए। यह कुछ हद तक फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों से प्रेरित थी।

बेल्जियम के छात्र समूहों का कहना है कि वे शिक्षा की बढ़ती लागत और ऐसे सुधारों का विरोध कर रहे हैं, जिनसे उन्हें डर है कि उच्च शिक्षा तक पहुंच और मुश्किल हो जाएगी।

कई प्रदर्शनकारियों ने मास्क पहन रखा था। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बेल्जियम के गृह मंत्री बर्नार्ड क्विंटिन ने कहा कि जो हो रहा है, वह अब केवल विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है और दंगाइयों से निपटने और व्यवस्था बहाल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।”

इटली, अल्बानिया और पुर्तगाल में भी प्रदर्शन

इटली के मिलान में महंगाई के खिलाफ मार्च के दौरान हिंसा भड़क गई। पुलिस ने केंद्रीय कैथेड्रल चौक को खाली कराने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। बोलोन्या में भी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी गईं।

समाचार एजेंसी एएनएसए के अनुसार, वहां सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार पांचवें दिन छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर रबर की गोलियां चलाईं।

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में आवास और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। वर्ष 2017 के बाद से देश में मकानों की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, जिससे आवास संकट गंभीर हो गया है। रैली का आह्वान देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन सीजीटीपी ने किया। संगठन के मुताबिक, राजधानी के मुख्य मार्गों में से एक पर हजारों की संख्या में लोग जुटे।

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